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Thursday, October 8, 2026

हत्या में आजीवन कारावास पा चुके तीन अभियुक्तों पर गैंगस्टर एक्ट में भी अदालत का शिकंजा

बांदा, के एस दुबे । हत्या जैसे गंभीर अपराध में आजीवन कारावास की सजा पा चुके रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू को गैंगस्टर एक्ट के मामले में भी अदालत ने दोषसिद्ध कर दिया। विशेष गैंगस्टर अदालत ने तीनों को 4-4 वर्ष के कठोर कारावास तथा 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न जमा करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने थाना कोतवाली नगर से संबंधित करीब 12 वर्ष पुराने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 18/2015 में 8 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। सजा के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला कारागार बांदा भेजने के निर्देश दिए गए।


धारा 3 गैंगस्टर एक्ट में दोषसिद्ध

न्यायालय ने रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह निवासी कनवारा, कल्लू सिंह निवासी झील का पुरवा और बलराम उर्फ बल्लू निवासी कनवारा को उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत दोषसिद्ध माना।

अभियोजन के अनुसार तीनों संगठित गिरोह के सदस्य थे और अपने तथा गैंग के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहते थे। अभियोजन ने आरोपों के समर्थन में गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमों के अभिलेख, एफआईआर, जीडी, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति समेत अन्य दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।

गंभीर मुकदमों का दर्ज था इतिहास

अभियोजन के अनुसार अभियुक्तों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट/वसूली, मारपीट, बलवा, धमकी, शस्त्र अधिनियम और गैंगस्टर एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमे दर्ज रहे हैं। गैंगचार्ट में धारा 386, 342, 353, 332, 323, 504, 394 आईपीसी, धारा 25 आयुध अधिनियम और धारा 7 सीएल एक्ट समेत अन्य धाराओं के मुकदमों का उल्लेख किया गया। अभियोजन के अनुसार हत्या के एक मामले में भी तीनों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।

एक अभियुक्त की मौत के बाद कार्यवाही समाप्त

मामले में प्रारंभ में चार अभियुक्त थे। इनमें सुशील सिंह की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई थी। उसकी फौती आख्या एवं संबंधित अभिलेख न्यायालय में प्रस्तुत होने के बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई। इसके बाद रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू के खिलाफ सुनवाई जारी रही।

विशेष लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी

मामले में राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने पैरवी की। अभियोजन की ओर से पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य और अमित कुमार ने भी आवश्यक अभिलेख एवं कार्यवाही में सहयोग किया। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने तीनों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की धारा 3 का अपराध सिद्ध माना और 4-4 वर्ष के कठोर कारावास तथा 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को विधि के अनुसार सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया।


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