तालाबों में जाने वाले गंदे पानी को रोके जाने की स्वयंसेवकों ने उठाई मांग
खागा/फतेहपुर, मो. शमशाद । गंगा समग्र ने नगर के पक्का तालाब की आरती की। गंगा समग्र व बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के स्वयंसेवको ने नदी तालाब के संरक्षण का संकल्प लिया। स्वयंसेवकों ने मांग किया कि तालाबों में जाने वाले गंदे पानी को रोका जाये। उन्हें ससुर खदेरी नदी में जाने वाले नालों से जोड़ा जाये। बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि जल संरक्षण के लिए जलाशयों को बचाने के लिए शासन-प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले जिस गति से बढ़ रहे थे, उससे तालाबों के अस्तित्व पर भी संकट के बादल थे। इन सब के बीच सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला शासनादेश बन गया। इसके तहत उत्तर प्रदेश में हजारों तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर जल संरक्षण के क्षेत्र में विशेष कार्य किया जाना
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| पक्का तालाब की आरती करते स्वयंसेवक। |
था लेकिन हुआ नहीं। सिविल अपील संख्या 4787/2001 हिंचलाल तिवारी बनाम कमलादेवी, ग्राम उगापुर, तालुका आसगांव, जिला संतरविदास नगर, उत्तर प्रदेश के मामले में तालाब को सार्वजनिक उपयोग की भूमि के तहत समतलीकरण कर यह करार दिया गया था कि वह अब तालाब के रूप में उपयोग में नहीं है। तालाब की ऐसी भूमि को आवासीय प्रयोजन हेतु आवंटन कर दिया गया था। इस मामले में 25 जुलाई 2001 को पारित हुए आदेश में कोर्ट ने कहा कि जंगल, तालाब, पोखर, पठार तथा पहाड आदि को समाज के लिए बहुमूल्य मानते हुए इनके अनुरक्षण को पर्यावरणीय संतुलन हेतु जरूरी बताया है। निर्देश है कि तालाबों को ध्यान देकर तालाब के रूप में ही बनाये रखना चाहिए। उनका विकास एवम् सुन्दरीकरण किया जाना चाहिए। जिससे जनता उसका उपयोग कर सके। आवासीय प्रयोजन के लिए आरक्षित भूमि को छोडकर किसी अन्य सार्वजनिक प्रयोजन की आरक्षित भूमि को आवासीय प्रयोजन हेतु आबादी में परिवर्तित किया जाना अत्यन्त आपत्तिजनक है।


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