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Tuesday, February 25, 2025

सुदामा चरित्र की कथा सुनकर नम हो गईं श्रोताओं की आंखें

मूंगुस गांव में शीतला धाम वार्षिकोत्सव पर आयोजित हुई श्रीमद् भागवत कथा।

तिंदवारी, के एस दुबे । ग्राम मूंगुस में स्थित श्री शीतला धाम के सप्तम वार्षिकोत्सव पर आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन ख्याति प्राप्त कथा व्यास आचार्य अभिषेक शुक्ला ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। सुदामा जी जितेंद्रिय एवं भगवान कृष्ण के परम मित्र थे। भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते। पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश है। उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राम्हण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौङकर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते । उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा प्रवाहित होने लगती है। सुदामा जी

श्रीमद्भागवत कथा बखान करते कथावाचक अभिषेक शुक्ला।

को सिंघासन पर बैठाकर कृष्ण जी सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा जी से आशीर्वाद लेती हैं। सुदामा जी विदा लेकर अपने स्थान लौटते हैं तो भगवान कृष्ण की कृपा से अपने यहां महल बना पाते हैं लेकिन सुदामा जी अपनी फूंस की बनी कुटिया में रहकर भगवान का सुमिरन करते हैं। इस लिए कहा गया है कि जब जब भक्तों पर विपदा आई है प्रभु उनका तारण करने जरुर आए हैं। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की और समाज में समानता का संदेश दिया। साथ ही भक्तों को बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का सात दिनों तक श्रवण करने से जीव का उद्धार हो जाता है तो वहीं इसे कराने वाले भी पुण्य के भागी होते हैं। सच्चा मित्र वही है जो अपने मित्र को विपत्ति में साथ दें। उसे अपने से नीचा रखने के बजाय समकक्ष बनाने का प्रयास करें। कहा कि मित्रता का अर्थ स्वार्थ नहीं बल्कि सहयोग और समर्पण होना चाहिए।अगले प्रसंग में शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई, जिससे उनके मन से मृत्यु का भय निकल गया। तक्षक नाग आता है और राजा परीक्षित को डस लेता है। राजा परीक्षित कथा श्रवण करने के कारण भगवान के परमधाम को पहुंचते हैं। कथा परीक्षित प्रकाशचंद्र अवस्थी तथा कलावती, जगदीश त्रिवेदी,कमलस्वरूप अवस्थी, भाजपा नेता आनंद स्वरूप द्विवेदी,प्रेमस्वरूप अवस्थी, निर्मल तिवारी, प्रमोद त्रिपाठी तथा श्री शीतला धाम समिति के प्रमुख कार्यकर्तागण मौजूद रहे।


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