राष्ट्रपति भवन में हुआ सम्मान
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । यह कोई साधारण दिन नहीं था। न राष्ट्रपति भवन की प्राचीरें उतनी शांत थीं और न ही चित्रकूट की हवाओं में आम सा ठहराव। 27 मई की शाम को जैसे पूरी चित्रकूट नगरी की आंखें राष्ट्रपति भवन की ओर टकटकी लगाए बैठी थीं। कारण था- एक सच्चे कर्मयोगी, एक युगद्रष्टा और नेत्र चिकित्सा के संत कहे जाने वाले डॉ बीके जैन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया जाना। जैसे ही महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के कर-कमलों से उन्हें यह सम्मान मिला, चित्रकूट की पवित्र भूमि और साधना की घाटियों
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| राष्ट्रपति से पदमश्री पुरस्कार प्राप्त करते डॉ बीके जैन |
में जयघोष की प्रतिध्वनि गूंज उठी। डॉ जैन वो नाम हैं, जिन्होंने अपनी कर्मभूमि चित्रकूट को केवल नेत्र चिकित्सा के नक्शे पर ही नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भी विशिष्ट पहचान दिलाई। जब 70 के दशक में उन्होंने साधारण जीवन छोड़ इस पवित्र भूमि को सेवा की प्रयोगशाला बनाया, तब शायद किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन यहाँ से ऐसा उजास फूटेगा, जो लाखों की अंधकार में डूबी जिन्दगियों को रोशनी लौटाएगा।


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