नरैनी तहसील सभागार में आयोजित किया गया जागरूकता शिविर
बांदा, के एस दुबे । नरैनी तहसील सभागार में नशीली दवाओं व अवैध तस्करी के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय दिवस व ग्राम न्यायालय के महत्व व उद्देश्य के संबंध में जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्क्ष व जिला जज देवेंद्र सिंह के निर्देश पर आयोजित शिविर में तमाम जानकारियां लोगों को दी गईं। अपर जिला जज व सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीपाल सिंह ने कहा कि नशे की लत से न सिर्फ धन व शरीर की हानि होती हैं बल्कि समाजिक प्रतिष्ठा का हनन होता है। परिवार में विघटन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। नशा मुक्त भारत योजना-2025 का उद्देश्य न केवल जन साधारण को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागृत करना है, बल्कि नशे के खिलाफ जन आंदोलन का रुप देना हैं। जिससे कि नशे के खिलाफ हर आदमी जुड़ कर अपना
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| शिविर को संबोधित करते अतिथि |
योगदान दे सकें। शिविर का मुख्य उद्देश्य नशीली दवाओं की लत के बारे में जागरुकता बढ़ाना, रोकथाम रणनीतियों से आमजन को शिक्षित व जागरूक करना तथा मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर जोर देना था। इसी कम में सचिव ने महिलाओं को प्राप्त मुफ्त कानूनी सहायता, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाव, देश की प्रत्येक महिला को सुरक्षा की भावना प्रदान करना, घरेलू हिंसा, एसिड अटैक आदि के सम्बंध में विस्तार से व्याख्यान किया गया। महिलाओं को कन्या भ्रूण हत्या, मानव तस्करी, पीछा करना, यौन शोषण, लिंग के आधार पर परेशान करना, यौन उत्पीड़न और इनमें सबसे भयावह अपराध बलात्कार जैसे अत्याचारों का शिकार होना पड़ता है। ऐसे उत्पीड़न का शिकार असंगठित क्षेत्रों में कार्य करने वाली महिलाएं, घरेलू काम करने वाली महिलाएं, निजी या सरकारी संगठनों में कार्य करने वाली महिलाएं होती है। सचिव ने बताया कि महिलाओं को ऐसी किसी प्रकार की समस्या होने पर वह अपना प्रार्थना पत्र कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरणस्वयं आकर अथवा डाक के माध्यम से भी दे सकती है जिस पर उन्हे मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जायेगी। आलोक कुमार वर्मा, न्यायाधिकारी, ग्राम
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| मौजूद लोग |
न्यायालय नरैनी ने कहा कि ग्राम न्यायालय की भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके क्षेत्र में ही न्याय दिलाना है। किसी भी ग्रामीण व्यक्ति को सामाजिक, आर्थिक या अन्य कारणों से न्याय से वंचित नहीं किया जाएं। इसका मुख्य उद्देश्य जिला और सिविल अदालतों पर मुकदमों के बोझ को कम करना भी हैं। इससे न सिर्फ ग्रामीणों को न्याय तक आसान पहुंच प्रदान करना बल्कि त्वरित न्याय भी प्रदान करना हैं। ग्राम न्यायालयों में फौजदारी व दीवानी दोनो प्रकार के मामलों की सुनवाई की जाती है। विवादों को सुलह के आधार पर आपसी सहमति से भी निपटान किया जाता हैं। न्यायाधिकारी द्वारा बताया गया कि अब मोबाइल अदालत का शुभारम्भ भी किया जा चुका है जिससे कि ग्रामीणों को उनके ग्राम में ही मोबाइल अदालत के जरिये वादों का निस्तारण किया जा सके। शिविर के अन्त में यशपाल यादव नायब तहसीलदार नरैनी द्वारा सभी आगन्तुकों का आभार जताया। शिविर में राशिद अहमद डीईओ, रोहित कुमार पीएलपी. सत्येन्द्र गर्ग पीएलवी व जितेन्द्र वर्मा पीएलवी के साथ श्रोतागण उपस्थित रहे।



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