चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में किसानों की आय बढ़ाने और दलहन उत्पादन को मजबूती देने के उद्देश्य से दीनदयाल शोध संस्थान के कृषि विज्ञान केन्द्र गनीवा द्वारा ग्रीष्मकालीन (जायद) मूंग की खेती पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिले के सभी विकासखंडों के 45 गांवों से आए 273 किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिक खेती की बारीकियां सीखीं। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ राजेन्द्र सिंह नेगी ने किसानों से जायद में मूंग और तिल की खेती अपनाने का आह्वान किया और बताया कि जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की पहल पर जिला खनन निधि से इस खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष धनराशि उपलब्ध कराई गई है। वैज्ञानिकों ने उन्नत किस्मों, बीज
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| प्रशिक्षण के बाद बीज किट के साथ किसान |
उपचार, समय से बुवाई और सिंचाई प्रबंधन की जानकारी दी। विशेषज्ञों के अनुसार 60-70 दिनों में तैयार होने वाली मूंग की फसल से प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपये तक शुद्ध आय संभव है। साथ ही यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने में भी सहायक है। जिले में जायद खेती का रकबा अगले पांच वर्षों में 40 से 50 हजार हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
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