वक्ता बोले- इतिहास के गुमनाम नायकों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की जरूरत
फतेहपुर, मो शमशाद । प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक व फतेहपुर में 32 दिनों तक स्वतंत्र शासन स्थापित कर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला देने वाले अमर शहीद डिप्टी कलेक्टर हिकमतउल्ला के 169 वां बलिदान दिवस पर रविवार को शहर के हिकमतउल्ला पार्क में श्रद्धांजलि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। शहीद डिप्टी कलेक्टर हिकमतउल्ला सेवा संस्थान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके अदम्य साहस और देशभक्ति को याद करते हुए कहा कि हिकमतउल्ला जैसे रणबांकुरों का इतिहास आज भी नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और बलिदान की प्रेरणा देता है।
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| विचार गोष्ठी को संबोधित करते पालिकाध्यक्ष राजकुमार मौर्य। |
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका परिषद चेयरमैन राजकुमार मौर्य, बार काउंसिल के अध्यक्ष बाबू सिंह यादव एडवोकेट रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में बार काउंसिल के महामंत्री अनुराग मिश्रा उर्फ पुत्तन मिश्रा, जहानाबाद विधानसभा से एआईएमआईएम के भावी प्रत्याशी अखिलेश पाल और जमीयत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल मोईद उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष मुहीउद्दीन एडवोकेट ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में मुहीउद्दीन एडवोकेट ने कहा कि 1857 की क्रांति में फतेहपुर की भूमिका अत्यंत गौरवशाली रही। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानियों के आह्वान पर तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर हिकमतउल्ला ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूंकते हुए जेल के ताले खुलवाकर कैदियों को मुक्त कराया। इसके बाद 10 जून 1857 को क्रांतिकारियों ने फतेहपुर पर अधिकार स्थापित किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से प्रभावित होकर नाना साहब ने हिकमतउल्ला को फतेहपुर का शासक (चकलेदार) नियुक्त किया। उन्होंने करीब 32 दिनों तक स्वतंत्र शासन चलाकर अंग्रेजी सत्ता को खुली चुनौती दी। उन्होंने बताया कि 12 जुलाई 1857 को मेजर हैवलाक और मेजर रेनाल्ड की संयुक्त अंग्रेजी सेना ने कुछ देशद्रोहियों की मुखबिरी के आधार पर हिकमतउल्ला को गिरफ्तार कर लिया। बिना किसी मुकदमे के उन्हें फतेहपुर कोतवाली गेट पर फांसी दे दी गई। वक्ताओं ने कहा कि उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। कैप्टन गुलशाद अहमद ने कहा कि देश की आजादी अनगिनत शहीदों की कुर्बानियों का परिणाम है। वहीं फजरूल रहमान उर्फ असलम मास्टर ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास के इन गुमनाम नायकों के संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। गोष्ठी के बाद सभी अतिथि एवं उपस्थित लोग कोतवाली स्थित शहीद हिकमतउल्ला द्वार पहुंचे, जहां पुष्पांजलि अर्पित कर अमर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए तथा उनकी याद में दुआ की गई। इस अवसर पर फरजानउद्दीन एडवोकेट, अमर सिंह एडवोकेट, अजलाल फारूकी एडवोकेट, मोहम्मद आसिफ एडवोकेट, सैय्यद फैजान एडवोकेट, प्रमोद एडवोकेट, अब्दुल सुहैल एडवोकेट, अस्लान जाफरी, हेमंत एडवोकेट, आमिर एडवोकेट, शिवम यादव एडवोकेट, जीशान एडवोकेट, इफ्तखार अहमद, शमसाद अली, सिराज, नौशाद, दानिश सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, समाजसेवी एवं नागरिक मौजूद रहे।


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