देवेश प्रताप सिंह राठौर
(वरिष्ठ पत्रकार)
..............पूरा विश्व आर्थिक रूप से आज परेशान चल रहा है चाइना के द्वारा भेजा गया कोरोनावायरस आज पूरा विश्व परेशान चल रहा है पिछले कुछ दशकों से विश्व की अर्थव्यवस्था मुक्त बाज़ारों की ओर बढ़ रही थी और विश्व को उसके लाभ भी मिलने लगे थे किन्तु अचानक इस व्यवस्था में अवरोध आया और अवरोध भी ऐसा कि लगने लगा है कि दुनिया शायद पहली बार एक बड़े आर्थिक शीतयुद्ध की ओर बढ़ रही है। दुनिया की इसी वर्तमान आर्थिक तनातनी का विश्लेषण करता है यह लेख। अमेरिका जिसने अपने घरेलू बाज़ारों को पूरी दुनिया के लिए खोल रखा था, अब कुछ समय से उसे अहसास होने लगा है कि कुछ देश उसकी नेकनीयती और सद्भावना का दुरुपयोग कर रहे हैं विशेषकर चीन।चीन ने अमेरिका के खुले बाज़ार की नीतियों का भरपूर लाभ लिया और अमेरिकी बाज़ारों को सस्ते चीनी माल से पाटकर अमेरिकी उद्योगों को चौपट कर दिया वहीं स्वयं अपने बाज़ारों और उद्योगों को बड़ी ही चतुराई से अमेरिकी उत्पादों से संरक्षित करके रखा हुआ है। इस तरह धीरे-धीरे दोनों देशों के बीच होने वाले आयात-निर्यात के बीचफासला लंबा होता चला गया और डॉलर का बहाव पूरी तरह चीन की ओर हो गया। राष्ट्रपति ट्रंप जो स्वयं एक व्यवसायी हैं, को शुरू से ही यह स्थिति अमेरिकी हितों के प्रतिकूल लग रही थी। उन्होंने कई मर्तबा प्रयास किए कि चीन स्वयं इस धोखाधड़ी से दूर हो जाए और दोनों देशों के बीच संतुलन के साथ आयात-निर्यात हो, किन्तु चीन के नेतृत्व ने ट्रंप की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर जो अमेरिकी विदेशी मुद्रा के रिसाव का एक बड़ा कारण है। अंततः राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए चीन से आयात होने वाले स्टील और एल्युमीनियम पर पच्चीस प्रतिशत का आयात शुल्क लगा दिया, जिससे अमेरिका को पचास अरब डॉलर का राजस्व मिलेगा साथ ही अमेरिकी स्टील मिलों को सस्ते चीनी स्टील के साथ स्पर्धा से राहत भी। स्वाभाविक है चीन को यह कदम पसंद नहीं आया और उसने जवाबी कार्यवाही करते हुए अमेरिका से आने वाले उत्पादों विशेषकर कृषि उत्पादों जैसे सोयाबीन, कपास, मक्का आदि पर आयात शुल्क ठोक दिया।इस कदम से अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ा। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कृषकों को लक्ष्य कर चीन ने इस शुल्क को लगाया है, जो उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन को चीनी माल की दूसरी सूची जारी करने का सुझाव दे दिया जिन पर शुल्क चस्पा किया जा सके ताकि सौ अरब डॉलर का नया शुल्क इकट्ठा किया जा सके। ट्रंपकी इस घोषणा से चीन फिर जवाबी कार्यवाही के लिए तैयार है। बात अब इतनी आगे बढ़ चुकी है कि इसका कोई सरल उपाय संभव नहीं है। उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि इतने वर्षों से अमेरिकी जनता सस्ते चीनी माल की आदी हो चुकी है। वो समय है जब भारत और चीन की सेनायें लद्दाख से ले कर कई अन्य मोर्चों पर आमने सामने आ कर खड़ी हो गई हैं. ये वही समय है देश देश निर्णायक स्थित में आ कर खड़ा हो गया है जब उसने तय कर लिया है कि किसी भी हाल में चीन की दादागीरी अब भविष्य में सहन नहीं किया जाएगा.. इस समय देश को एकजुटता दिखाने की आशा थी लेकिन वामपंथी वर्ग द्वारा अब तक चीन के विरुद्ध कोई बयान नहीं आया है और सबसे ख़ास बात ये है कि पुलवामा जैसा ही एक अन्य हमला कश्मीर में कर के संभवतः एक संदेश देने का प्रयास किया गया है कि यदि युद्ध होता है तो गद्दारों का एक वर्ग किसकी तरफ से खड़ा मिलेगा.. यद्दपि ये तय नहीं है लेकिन एन उसी मौके पर ब्लास्ट कर के यकीनन एक संदेश देने का प्रयास किया गया है चीन को कि उस से किसी भी टकराव के समय ये गद्दार किस की तरफ से लड़ेंगे. कश्मीर में एक बार फिर से पुलवामा दोहराने से बच गया है. गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में पुलवामा जैसे आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया। पुलवामा के पास एक सैंट्रो गाड़ी में रखी गई थी, जिसकी समय रहते हुए पहचान कर ली गई और बम डिस्पोज़ल स्क्वायड ने वक्त रहते ही बम को डिफ्यूज़ कर दिया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया। जल्द ही एनआईए इस इलाके का दौरा करेगी और इस इस मामले की पूरी जांच होगी। इस गाड़ी को एक आतंकी चला रहा था, जो कि गोलीबारी के बाद अंधेरे में ही भाग गया फिर इस गाड़ी को पुलवामा के रजपुरा रोड के पास शादीपुरा में पकड़ा गया। बम डिस्पोज़ल यूनिट को बुलाने से पहले आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया। इससे पहले पिछले साल पुलवामा में आतंकी हमला किया गया था, जिसमें एक गाड़ी में बम रखा गया था और उसे CRPF के काफिले में घुसा दिया गया था, फरवरी 2019 में हुए उस आतंकी हमले में करीब 45 जवान बलिदान हो गए थे। उसी तरह आज आतंकी फिर से आतंकवादी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे, लेकिन सुरक्षाबलों ने इसे नाकाम कर दिया । पिछले कुछ महीनों से लगातार आतंकियों की ओर से कई तरह की कोशिशें जा रही है, कि कैसे जम्मू-कश्मीर की शांति व्यवस्था को भंग किया जाए और इसी के चलते बड़े आतंकी हमले की साजिश के लिए आतंकी, जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में छुपे बैठे हैं। सुरक्षाबल इन्हें ढूंढ कर इनका एनकाउंटर कर रही है।


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