आपातकाल की विभीषिका के 50 वर्ष के मौके पर आयोजित हुई संगोष्ठी
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में भी संगोष्ठी आयोजित हुई
बांदा, के एस दुबे । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आपातकाल की विभीषिका के 50 वर्ष के अवसर पर आपातकालीन संघर्ष गाथा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता जिला प्रमुख डॉ. शैलेश सिंह व संचालन आयुषी त्रिपाठी ने किया। लोकतंत्र सेनानी अखिलेश श्रीवास्तव व मैयादिन सोनी ने संयुक्त रूप से अपनी आपातकाल के दौरान संघर्ष को बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमें याद दिलाता है उस काले अध्याय की, जब भारत के लोकतंत्र को एक तानाशाह सोंच ने कुचलने की कोशिश की थी। 25 जून 1975 को देश में आपातकाल थोप दिया गया। संविधान को ताक पर रखकर, न्याय पालिका को दबाकर और जनता की आवाज़ को कुचलने का घिनौना प्रयास हुआ। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इसका डटकर विरोध करती है और करती रहेगी। मुख्य वक्ता डाॅ. दीपाली गुप्ता ने कहा कि हम नहीं भूल सकते कि किस तरह से गरीबों
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| संगोष्ठी में मौजूद अतिथि। |
को ज़बरन नसबंदी का शिकार बनाया गया। युवाओं की आवाज़ को लाठियों से दबाया गया। पत्रकारों की कलम को कैद में डाल दिया गया। संविधान की आत्मा को जंजीरों में जकड़ा गया। वो दौर था जब ‘सरकार’ ने खुद को ‘देश’ समझ लिया और सत्ता की रक्षा के नाम पर हर आवाज़ को कुचलने की कोशिश की। डॉ. अशोक परिहार ने बताया कि यह भारत की भूमि है यहां न झुकने वाले पैदा होते हैं, न डरने वाले, विद्यार्थी परिषद का हर कार्यकर्ता संगोष्ठी के माध्यम से ये संकल्प लेता है कि जब जब कोई तानाशाही सोच हमारे लोकतंत्र को चुनौती देगी, तब तब हम सड़कों पर उतरेंगे। जिला प्रमुख डॉ. शैलेश सिंह ने बताया कि हम इस संगोष्ठी को सिर्फ विरोध की नहीं, चेतना की संगोष्ठी मानते हैं। ये संगोष्ठी है याद की, न्याय की, और आने वाली पीढ़ियों को यह बताने की कि भारत की जनता चुप नहीं बैठती, इतिहास गवाह है हमने हर तानाशाह सोच को नकारा है। कार्यक्रम के दौरान लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. जितेंद्र वाजपेयी, डॉ. विक्रम बाला, विभाग संगठन मंत्री शिवम पांडेय, दिव्यांशु गोविंद, कार्तिकेय, नीतीश, आशीष, राज, अभय, श्लोक, स्वतंत्र साहू, रामेंद्र, वंश, अनामिका, मानसी आदि मौजूद रहे। इधर, राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में आपातकाल से जुडी त्रासदी व विपत्तियों पर छात्र-छात्राओं द्वारा विभिन्न कार्यक्रम किएगए। छात्र-छात्राओं द्वारा आपातकालीन संघर्ष गाथा विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। प्राचार्य दीपाली गुप्ता ने कहा कि यह केवल आपातकाल के स्मरण का अवसर मात्र नहीं है बल्कि गहन चिंतन और लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों के प्रति नई प्रतिबद्धता का अवसर भी है। हम यह भूल नहीं सकते कि किस तरह से गरीबों को जबरन नसबंदी का शिकार बनाया गया। युवाओं की आवाज को लाठियों से दबाया गया। पत्रकार की कलम को कैद में डाल दिया गया। लोकतंत्र सेनानी अखिलेश श्रीवास्तव, मैयादीन सोनी ने संयुक्त रूप से अपनी आपातकाल के दौरान संघर्ष को बताया। इस मौके पर डॉ. शैलेश सिंह, डॉ. जय कुमार चौरसिया, डॉ. जय प्रकाश सिंह, डॉ1 संजीव कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।


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