चित्रकूट ब्यूरो, सुखेन्द्र अग्रहरि : अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान एवं जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में चल रही सात दिवसीय ग्रीष्मकालीन कार्यशाला का सोमवार को समापन हुआ। कार्यशाला में डीएवी पीजी कॉलिज कानपुर के प्रोफेसर संजय प्रताप सिंह ने बौद्ध दर्शन की वर्तमान संदर्भ में मानवीय मूल्य के लिए उपादेयता विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कहा कि बौद्ध दर्शन की वाणी व्यक्ति के जीवन को परिमार्जित करने में अहम भूमिका अदा करती है। बुद्ध की वाणी के द्वारा कहे गए एक-एक वाक्य में उत्कृष्ट जीवन मूल्य समाहित हैं, जिन्हें अपना कर मानव जीवन को सर्वोत्तम लक्ष्य की प्राप्ति की ओर अग्रसर किया जा सकता है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय त्रिपुरा के प्रो अवधेश कुमार चौबे ने बौद्ध दर्शन के सैद्धांतिक पक्ष की विवेचना करते हुए इसकी व्यावहारिकता पर प्रकाश डाला। राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरु
प्रोफेसर आईपी त्रिपाठी ने कहा कि बौद्ध दर्शन की शिक्षाएं नैतिक मूल्यों की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं, जो अत्यंत पापी व्यक्ति को भी सद्मार्ग की ओर प्रेरित करती हैं। बौद्ध दर्शन मानव को महामानव बनने का मार्ग प्रशस्त करता हैं। संयोजक डॉ हरिकांत मिश्रा ने इस सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का पूर्ण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक डॉ राकेश सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के एमओयू के अंतर्गत आयोजित होने वाली वह कार्यशाला है, जिसमें प्रदेश की 75 जनपदों में बुद्ध की वाणी के द्वारा जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला जाएगा। इसका प्रारंभ चित्रकूट से हुआ है। कार्यशाला में विश्वविद्यालय कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय, डॉ किरन त्रिपाठी, शोध छात्रा अर्चना सिंह सहित अन्य विद्वानों ने ऑनलाइन व ऑफलाइन माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ शशिकांत त्रिपाठी, डॉ प्रमिला मिश्रा, डॉ रजनीश कुमार सिंह, डॉ रमा सोनी, डॉ रीना पांडेय, डॉ अमिता त्रिपाठी, डॉ रवि प्रकाश शुक्ल, डॉ नीतू तिवारी, डॉ दुर्गेश कुमार मिश्र, डॉ शांत कुमार चतुर्वेदी, डॉ जितेंद्र प्रताप सिंह, डॉ भविष्या माथुर, डॉ गोपाल कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे।


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