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Monday, January 5, 2026

अंधकार से प्रकाश की यात्रा: झाँसी में ब्रेल दिवस पर सजी संवेदना की सांस्कृतिक संध्या

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

उत्तर प्रदेश जहाँ स्पर्श बना शब्द: दीनदयाल सभागार में भावनाओं के साथ मना लुई ब्रेल दिवस

झाँसी। शिक्षा, संवेदना और समानता के भाव से ओत-प्रोत वातावरण में आज दीनदयाल सभागार साक्षी बना एक ऐसे आयोजन का, जहाँ शब्द नहीं स्पर्श ने पढ़ाया और मौन ने ज्ञान की आवाज़ दी। बुंदेलखंड दृष्टिहीन एवं दिव्यांग कल्याण संस्थान (रजि०) के तत्वावधान में लुई ब्रेल दिवस गरिमा, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. संदीप सरावगी तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. जिज्ञासा तिवारी रहीं।  समारोह का शुभारंभ लुई ब्रेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीपशिखा की लौ जैसे अज्ञान के अंधकार को चीरती हुई दृष्टिहीनों के जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलाने का संदेश दे रही थी। इसके पश्चात दिव्यांग विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा को आँखों की नहीं, आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है। शुभम, मनीषा, चांद, अभी, श्रद्धा, प्रथम, लहर एवं गीता सेन की प्रस्तुतियों ने सभागार को तालियों की गूंज से भर दिया और उपस्थित जनमानस भावविभोर हो उठा।



मुख्य अतिथि डॉ. संदीप सरावगी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि “दृष्टिहीनता कमजोरी नहीं है, कमजोरी तब होती है जब समाज अवसरों के द्वार बंद कर देता है। लुई ब्रेल ने स्पर्श के माध्यम से ज्ञान का जो दीप जलाया, उसने दुनिया को यह सिखाया कि शिक्षा हर व्यक्ति का अधिकार है। हमें केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसरों की संस्कृति विकसित करनी होगी। जहाँ दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनें, नेतृत्व करें और समाज को दिशा दें।” उन्होंने आगे कहा कि ब्रेल लिपि सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तिकरण का प्रतीक है तथा ऐसे आयोजनों से समाज में संवेदनशीलता बढ़ती है और समावेशी सोच को मजबूती मिलती है। सीमा श्रीवास्तव ने लुई ब्रेल के जीवन-संघर्ष और ब्रेल लिपि की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रेल लिपि केवल पढ़ने की विधि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का सेतु है। वहीं जितेंद्र वर्मा, विनीत अग्रवाल, अरविंद सक्सेना, प्रदीप श्रीवास्तव, अजय कुमार सक्सेना, सुशील एवं चुन्नीलाल ने अपने विचारों के माध्यम से ब्रेल लिपि के सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में मंटू वाल्मीकि, नेहा सक्सेना, अनीता गुप्ता, पूनम सेन, सुमन तथा रघुवीर प्रसाद चतुर्वेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह का कुशल संचालन सर्वेश सक्सेना ने किया, जबकि आभार प्रमोद सेन एवं सीमा श्रीवास्तव द्वारा व्यक्त किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि दिव्यांगता कोई बाधा नहीं, बल्कि एक अलग सामर्थ्य है, जिसे समाज के सहयोग और संवेदना की आवश्यकता है।

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