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Sunday, January 4, 2026

मौसम की मार से परेशान किसान, चना, सरसों और अरहर की फसल को नुकसान

कोहरे की वजह से सरसों की फसल में माहू रोग लगने की संभावना बढ़ी

जिला कृषि अधिकारी ने 15 जनवरी तक मौसम सामान्य होने की उम्मीद जताई

बांदा, के एस दुबे । जनवरी माह की शीतलहरी के साथ कोहरा किसानों की कमर तोड़ रहा है। सरसों की फसल का फूल झड़ रहा है, इससे उत्पादकता पर असर पड़ना तय है। करीब 15 हजार से अधिक हेक्टयेर में बोई की सरसों की फसल में माहू रोग लगने और चने की फसल में पाला लगने की संभावना से किसान परेशान हो उठा है। जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार के मुताबिक किसानों के खेतों में लहलहा रही फसल पर मौसम की मार पड़ने की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि कर्बंडाजेम-75 का घोल बनाकर खेतों पर छिड़काव करें। एक एकड़ में तीन सौ लीटर पानी में दवा मिलाएं। एक लीटर पानी में दो ग्राम दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। कृषि अधिकारी ने बताया कि चना, मटर और गेहूं की फसल में भी कोहरे के चलते पाला का असर होने की

खेतों में लहलहाती सरसों की फसल, कोहरे से फूल झड़ने का है खतरा।

संभावना है। बताया कि कोहरे की वजह से पत्तियां सूखने लगती हैं। बचाव के लिए किसानों को शाम के समय हल्की सिंचाई की सलाह दी गई। साथ ही खेतों के चारों कोनों में घास-फूस जलाकर हल्का धुआं किया जाए तो फसलों को पाले से बचाया जा सकता है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि शीतलहरी और कोहरे की वजह से सरसों की फसल में माहू रोग लग जाता है। इसे कीट भी कहा जाता है, यह पौधे में फूल से लेकर नीचे तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि कोई भी कीटनाशक का घोल बनाकर सरसों की फसल में पौध पर ऊपर से नीचे तक छिड़काव किया जाए तो कीट रोग से फसल को बचाया जा सकता है। चना और मटर की फसलों पर भी कृषि विभाग ने दवा छिड़काव किए जाने की बात कही है। जिला कृषि अधिकारी ने वर्तमान मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने के साथ ही दवा का छि़ड़काव कर और खेतों के चारों तरफ धुआं करते हुए पाला व कीट रोग से फसल बचाने की बात कही है। उन्होंने दावा किया कि 15 जनवरी तक मौसम के सामान्य होने की संभावना है। तब तक किसान सावधानी बरतें।


घने कोहरे से क्या हो सकता है नुकसान

घना कोहरा सरसों, मटर और आलू की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर यदि यह कई दिनों तक बना रहे और धूप न निकले। इससे इन फसलों में नमी बढ़ जाती है, जिससे विभिन्न प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ जाता है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है।

आलू की फसल - घने कोहरे के कारण पत्तियों पर लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जिससे अगैती झुलसा और पिछेती झुलसा रोग तेजी से फैलते हैं। यदि स्थिति गंभीर हो जाए, तो पूरी फसल नष्ट हो सकती है।

सरसों की फसल - कोहरे और धूप की कमी से सरसों के पौधों की बढ़वार रुक जाती है। फूलों और फलियों पर नमी जमने से ''''माहू'''' कीट का प्रकोप बढ़ जाता है और फली में दाने नहीं बन पाते हैं या फसल पीली पड़ जाती है।

मटर की फसल - मटर की फसल में भी लगातार नमी से जड़ सड़न और पीलापन जैसी समस्याएं आ सकती हैं। हालांकि, मुख्य रूप से आलू और सरसों की तुलना में मटर पर कम प्रभाव देखा गया है, लेकिन लंबे समय तक खराब मौसम इसे भी प्रभावित कर सकता है।


फसलों को नुकसान से बचाने के उपाय

हल्की सिंचाई - शाम के समय खेत में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान बना रहता है, जिससे पाले का असर कम होता है।

दवाओं का छिड़काव: आलू की फसल को झुलसा रोग से बचाने के लिए मैंकोजेब जैसे फफूंदनाशक का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव किया जा सकता है। सरसों में माहू कीट के नियंत्रण के - लिए क्लोरो पिरोफास या इमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव फायदेमंद होता है।

धुंआ करना - रात में खेतों के किनारे घास-फूस या कूड़ा जलाकर धुआं करने से भी पाले का प्रभाव कम किया जा सकता है।

उचित जल निकासी - सुनिश्चित करें कि खेतों में पानी जमा न हो, क्योंकि रुका हुआ पानी जड़ों में सड़न पैदा कर सकता है।

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

बांदा। मौसम व कृषि वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि मौसम का मिजाज ठंडा होने और कोहरे के चलते सरसों और आलू की फसल के साथ ही अरहर व मटर की फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह देते हुए कहा कि कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें और शाम के समय हल्की सिंचाई के साथ ही खेतों के चारों ओर घास-फूस जलाकर धुआं करें, ताकि फसलों को पाला और झुलसा रोग से बचाया जा सके।


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