कानपुर, प्रदीप शर्मा- छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर के रक्षा एवं सामरिक अध्ययन विभाग के शोधार्थी अखिलेश द्विवेदी ने कंटेंपरेरी इंडियन वार प्रीपार्टेंडेंस और रोल ऑफ़ डिफेंस स्ट्रेटजी विषय मे अपनी पीएचडी सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है जो भारत की वर्तमान रक्षा तैयारियों, सामरिक संरचना और भविष्य की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। शोध में बताया गया है कि आधुनिक युद्ध की अवधारणा अब केवल पारंपरिक सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें साइबर सुरक्षा, सूचना युद्ध, आंतरिक सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा रणनीतिक नीति-निर्माण जैसी बहुआयामी चुनौतियाँ निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। अध्ययन में भारत के लिए समग्र और बहुआयामी रक्षा रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
शोध के निष्कर्षों के बारे में बताते हुए कहा गया कि रक्षा नीति और उसके ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। इससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में होने वाला आर्थिक व्यय भी अधिक परिणामोन्मुखी बन सकेगा। यह शोध नीति-निर्माताओं के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन के रूप में भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है। शोधार्थी अखिलेश द्विवेदी वर्तमान में बेंगलुरु में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं, जिससे उनके शोध को व्यावहारिक अनुभव का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। यह शोध प्रो. अरुण कुमार दीक्षित के निर्देशन में संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय द्वारा उनकी इस उपलब्धि को सीएसजेएमयू में रक्षा एवं सामरिक अध्ययन के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध की सशक्त मिसाल बताते हुए अखिलेश द्विवेदी को शुभकामनाएँ दी हैं।


No comments:
Post a Comment