कानपुर, प्रदीप शर्मा - विस्तार इकाई, सुगन्ध एवं सुरस विकास केंद्र, कानपुर (एफएसडीसी) कानपुर केंद्र द्वारा सुगन्ध उद्योग के प्रबंधन पर एक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जागरण कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में किया गया, जिसका उदघाटन कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ अस्मिता दुबे ने किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एफएसडीसी के सहायक निदेशक प्रभारी डॉ.भक्ति विजय शुक्ला ने कहा कि सुगंध एवं संबद्ध उद्योग आज रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है. उन्होंने कहा कि अगरबत्ती, धूपबत्ती, एसेन्शियल ऑयल और अन्य सुगंधित उत्पादों के निर्माण के क्षेत्र में कम निवेश के साथ सफल उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्विद्यालय के इन्नोवेशन फाउंडेशन के इन्नोवेशन अधिकारी अनिल त्रिपाठी ने स्टार्टअप व नवाचार के बारे में बतलाया।वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को सुगंध उद्योग में स्वरोजगार और उद्यमिता विकास की संभावनाओं से परिचित कराना है।उद्यमी मयंक गहोई ने प्रशिक्षण सत्र में प्रतिभागियों को उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की उपलब्धता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के
व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देने के साथ ही डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार विस्तार के बारे में बताया। कार्यक्रम के अंत डॉ विकास द्विवेदी ने कहा कि यह प्रशिक्षण स्वरोजगार को बढ़ावा देने और नए उद्यमों की सुगंध व सुरस उद्योग पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच दिन तक चलेगा।पांच दिवसीय इस कार्यशाला में सभी प्रतिभागी अरोमा उद्योग के बारे में जानेंगे साथ ही साथ स्वरोजगार, उद्यमिता विकास और बाजार की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।कार्यक्रम का संयोजन डॉ विकास द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डॉ हेमा रोहरा, डॉ रेशमा राजानी, डॉ हर्ष कुमार चावला, डॉ राजीव नयन सिंह, डॉ के वी के सिंह, डॉ अंशुल सक्सेना, डॉ वर्षा श्रीवास्तव, डॉ आरती कटियार, प्रशांत खरे, सौरभ बाजपेई सहित 100 प्रतिभागियो ने प्रतिभाग किया।


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