बांदा, के एस दुबे । कांग्रेसियों ने अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। कहा कि महान क्रांतिकारी का बुंदेलखंड के लोगों से गहरा नाता रहा है। अंग्रेज पुलिस अधिकारी की हत्या के बाद उन्होंने बुंदेलखंड के झांसी, टीकमगढ़, दतिया और बाँदा में ही रहकर अपना अज्ञातवास काटा। जिला कांग्रेस कार्यालय में शुक्रवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित की अगुवाई में पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की पुण्यतिथि मनाई। कांग्रेसजनों ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। जिलाध्यक्ष ने कहा कि बाँदा के क्रांतिकारी पंडित गोपीनाथ दनादन, जगन्नाथ करवरिया, महादेव भाई, हल्का लोहार के आग्रह पर 1927 में वह यहां आए थे। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित गोपीनाथ दनादन के निवास पर दो दिन व एक रात
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| कार्यक्रम के दौरान मौजूद कांग्रेसी |
रुक कर प्रमुख क्रांतिकारियों के साथ आजादी की योजना बनाई थी। निम्नी नाला किनारे प्रागी मंदिर में क्रांतिकारियों को शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण दिया। 27 फरवरी 1931 को गुप्तचरों की सूचना पर इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेज अफसरों ने घेराबंदी कर आजाद पर गोलियां बरसाना शुरू कर दी। वीर सपूत ने डटकर मुकाबला किया और 10 अंग्रेज अफसरों को मार गिराया। आजाद था, आजाद हूं, आजाद रहूंगा कहकर खुद की पिस्तौल से अपनी कनपटी में गोली मारकर वीरगति को प्राप्त हुए। इस मौके पर शिवबली सिंह, सत्यप्रकाश द्विवेदी, हेमंत वर्मा, संतोष द्विवेदी, धीरेंद्र पांडेय धीरू, राजेश गुप्ता पप्पू, इस्लाम भाई, शब्बीर सौदागर, सज्जाद, आदित्य द्विवेदी, अलीबक्श, सुखदेव गांधी सहित अनेक कांग्रेसी मौजूद रहे।


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