आस्था की रोशनी में सियासी धुंध
गौरव दिवस पर गरमाई सियासत
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले की पावन धरती पर एक ओर जहां गौरव दिवस के नाम पर 22 लाख दीपों की रोशनी का दावा आसमान छूता नजर आया, वहीं दूसरी ओर इन दावों की चमक पर सवालों की स्याही भी गहराती चली गई। प्रशासन ने विकास और भव्यता के गीत गाए, मंच सजे, भाषणों में उजालों की इबारत लिखी गई, और बड़े-बड़े नेता इस रोशनी के कारवां में अपना नाम दर्ज कराने की होड़ में आगे बढ़ते दिखे। मगर इसी उजाले के बीच पूर्व सांसद भैरव प्रसाद मिश्रा की कलम ने एक ऐसा सवाल उछाल दिया, जिसने पूरे माहौल को सियासी धुंध में लपेट दिया। सोशल मीडिया पर वायरल उनके पत्र में शब्द नहीं, बल्कि तंज की तपिश थी- जहां एक लाख दीप भी मुश्किल से जले, वहां 11 लाख और 22 लाख की गूंज किस सच्चाई की दास्तां कहती है? उन्होंने आरोप लगाया कि
![]() |
| दीपदान करते जिम्मेदार |
प्रशासन द्वारा पेश किए गए आंकड़े हकीकत से कोसों दूर हैं और यह केवल एक दिखावटी मंजर है, जिसने न सिर्फ सच्चाई को धुंधला किया बल्कि लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंचाई। आगे कहा जा सकता है कि- दीप जले या ख्वाब जले, ये हिसाब कौन रखे, जो सच था वो छिप गया, अब जवाब कौन रखे। पूर्व सांसद ने इस पूरे प्रकरण को फर्जी बयानबाजी” करार देते हुए भगवान कामतानाथ से प्रार्थना की कि जो भी इस भ्रमजाल के जिम्मेदार हैं, उन्हें उचित दंड मिले। अब सवाल यही है- क्या ये दीप वास्तव में जले थे, या फिर आंकड़ों की रोशनी में सच कहीं बुझ गया?
.jpeg)

No comments:
Post a Comment