वीडियो उबलते रहे, रिपोर्टें ठंडी
खनन पर क्लीन चिट का खेल?
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले की फिजाओं में इन दिनों धूल के साथ-साथ सवाल भी उड़ रहे हैं। एक ओर सोशल मीडिया पर अवैध खनन के वीडियो और तस्वीरें आग की तरह फैल रही हैं, तो दूसरी ओर जिला खनिज अधिकारी की हर जांच क्लीन चिट के साए में सिमटती नजर आ रही है, जो पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही है। आरोप इतने गंभीर हैं कि चर्चाओं में यह तक कहा जा रहा है कि निरीक्षण से पहले ही खनन स्थलों तक सूचना पहुंच जाती है और मौके पर सब कुछ अचानक व्यवस्थित दिखने लगता है, जिससे हर रिपोर्ट साफ-सुथरी बनकर निकलती है। अब बड़ा सवाल है कि आखिर यह सूचना किस रास्ते से बहती है- क्या यह महज संयोग है या व्यवस्था की परतों में कहीं कोई खामोश इशारा छिपा है। कहें तो, -धूल तो उठती है हर ओर, मगर आंखें क्यों नम नहीं, कुछ तो है जो दिखता नहीं, पर होता हरदम यहीं- हाल ही में बांदा में खनन का मामला तब सुर्खियों में आया
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| सोशल मीडिया में वायरत खनन की क्लिप |
जब वीडियो बड़े स्तर पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव के सोशल मीडिया से वायरल हुआ और उसके बाद कार्रवाई की बातें सामने आईं। ऐसे में यह सवाल और गहरा जाता है कि क्या चित्रकूट में अवैध खनन तब तक अदृश्य बना रहेगा, जब तक कोई बड़ा मंच या बड़ा नाम उसे उजागर न करे। स्थानीय लोग बताते हैं कि शिकायतें दी जाती हैं, फोन किए जाते हैं, मगर जवाब में अक्सर सन्नाटा ही मिलता है और अगर कुछ कार्रवाई होती भी है तो वह महज खानापूर्ति बनकर रह जाती है। ऐसे में यह प्रकरण अब केवल खनन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जनविश्वास का बन गया है। आखिर सच क्या है- धूल में छिपा हुआ या कागजों में दर्ज- जवाब अब प्रशासन को देना ही होगा वो भी पूरी पारदर्शिता के साथ।


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