मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास ने कराया रामकथा का रसपान
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि - परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी महाराज के कर कमलों से जानकीकुंड में स्थापित श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बड़ी गुफा के तत्वाधान में विद्याधाम विद्यालय प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री रामकथा में वृंदावन से पधारे मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास जी महराज द्वारा राम कथा का रामभक्तो को रसपान कराया जा रहा है। कथा के छठवें दिन सर्वप्रथम श्री सदगुरू सेवा संस्थान की ट्रस्टी एवं संस्थान के अध्यक्ष विशद भाई मफतलाल की धर्म पत्नी रूपल बहन ने रामकथा की पोथी और महराज जी का पूजन अर्चन किया।तत्पश्चात महराज जी ने अपनी मधुर, अमृतमय वाणी से देश के कोने कोने से आए कथा श्रोताओं को भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जन्म की कथा का प्रसंग का रसपान कराते हुए बताया कि मनु और शतरूपा प्राचीन काल के आदिपुरुष और
आदिनारी माने जाते हैं। उन्होंने भगवान की कठोर तपस्या किया और भगवान विष्णु को अपनी कठोर तपस्या से प्रसन्न किया। जब भगवान नारायण प्रकट हुए, तब मनु और शतरूपा ने उनसे वर माँगा कि वे स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लें। भगवान नारायण विष्णु ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर यह वरदान स्वीकार कर लिया और कहा कि वे त्रेता युग में उनके यहाँ अवतार लेंगे। समय बीतने पर त्रेता युग में अयोध्या के चक्रवर्ती राजा दशरथ के यहाँ भगवान विष्णु ने अपने अंशों के सहित श्रीराम के रूप में जन्म लिया। राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं—कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा। पुत्र प्राप्ति के लिए उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिसके फलस्वरूप श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और
शत्रुघ्न का जन्म हुआ। जिसमें श्रीराम को नारायण विष्णु के अवतार है। इस प्रकार मनु और शतरूपा की तपस्या का फल उन्हें श्रीराम के रूप में प्राप्त हुआ। श्री राम जन्म की कथा का प्रसंग सुन सभी श्रोतागण भक्ति भाव से विभोर हो उठे।इस मौके पर चित्रकूट के सभी संत महंत, आमजनमानस,तमाम प्रांतों से पधारे गुरु भाई बहन एवं सदगुरू परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे।



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