खनन का रहस्यमयी खेल
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले की सरजमीं पर इन दिनों अजब सा मंजर है- धूल हर ओर उड़ रही है, मगर उंगलियां सिर्फ एक ही नाम की तरफ उठ रही हैं। सोशल मीडिया के गलियारों में जगजीत सिंह का नाम यूं गूंज रहा है, मानो पूरे जिले का खनन उसी एक खदान में सिमट गया हो। लेकिन सवाल है कि क्या सचमुच अवैध खनन केवल एक ही स्थान पर हो रहा है, या फिर कई खदानों की कहानी को एक चेहरे के पीछे छुपा दिया गया है। मऊ तहसील के रेडी भुसौली बालू खदान को लेकर वायरल संदेशों में मानक विहीन खनन, सैकड़ों ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और किसानों की बर्बाद होती फसलों की बात कही जा रही है, जहां लाल सोना बेखौफ बहने के आरोप हैं और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन इस शोर के बीच एक गहरा सन्नाटा भी है- जिले की
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| वायरल वीडियो में खनन साइट जहां अवैध खनन के आरोप है। |
अन्य खनन साइटों पर, जहां पहले भी शिकायतें उठती रही हैं, पर अब चर्चा का केंद्र केवल एक नाम क्यों है। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि बाजार में पहले से जमे खनन कारोबारियों के बीच नए खिलाड़ी के प्रवेश से हलचल बढ़ी है और दबाव बनाने की कोशिशें भी इस शोर का कारण हो सकती हैं। दूसरे लहजे में कहें तो, हर पत्थर पर इल्जाम नहीं होता, कुछ निशाने भी बनाए जाते हैं जनाब और जगजीत सिंह वही निशाना है। ऐसे में यह सवाल और गहराता है कि क्या यह महज अवैध खनन का मामला है या फिर प्रभाव और वर्चस्व की अदृश्य लड़ाई। चित्रकूट में अब खनन सिर्फ जमीन नहीं काट रहा, बल्कि सच्चाई और नैरेटिव के बीच की रेखा भी धुंधली कर रहा है।
अवैध खनन या प्रशासनिक संरक्षण? सूत्रों के अनुसार कुछ संगठनों ने रेडी भुसौली खदान प्रकरण को लेकर जगजीत सिंह के खिलाफ खनिज अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। साथ ही खनिज अधिकारी पर फोन न उठाने और शिकायतों की अनदेखी करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दिलचस्प यह है कि स्थानीय चर्चाओं में जगजीत सिंह को ऊपर से संरक्षण मिलने की बातें भी सामने आ रही हैं। इसी वजह से बाकी खनन वालों को जगजीत सिंह से ईर्ष्या है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या यह संरक्षण वैधता में बदल गया है, या फिर नियमों की अनदेखी हो रही है? मामले में पारदर्शी जांच और स्पष्ट जवाब अब बेहद जरूरी हो गया है।


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