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Tuesday, March 24, 2026

लाइब्रेरी अकादमिक संस्थानों का हृदय है - प्रो. मुकेश पाण्डेय

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए डिजिटल शोध संसाधनों पर कार्यशाला संपन्न

इन्फ्लिबनेट विशेषज्ञों ने IRINS, शोध चक्र और डिजिटल पहचान आईडी के माध्यम से वैश्विक शोध मानकों को अपनाने पर दिया जोर

देवेश प्रताप सिंह राठौर 

उत्तर प्रदेश, झाँसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी में यूजीसी और इन्फ्लिबनेट (INFLIBNET) के सहयोग से आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में शोध की गुणवत्ता और डिजिटल सुलभता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने पुस्तकालय को विश्वविद्यालय का हृदय बताते हुए कहा कि 2002 से इन्फ्लिबनेट का सदस्य होने के नाते संस्थान ने शोध के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की शोध सुविधाओं और इनक्यूबेशन सेंटर की सफलता पर भी प्रकाश डाला। IQAC निदेशक प्रो. सुनील काबिया ने रैंकिंग में सुधार के लिए डेटा प्रबंधन के महत्व को समझाया, जबकि संयोजक डॉ. श्रीदेवी ने शोधार्थियों को इन आधुनिक सेवाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।


तकनीकी सत्रों के दौरान इन्फ्लिबनेट गांधीनगर से आए विशेषज्ञ हितेश कुमार सोलंकी और राजन कुमार ने 'शोध चक्र' और डिजिटल पहचान के महत्व पर विशेष सत्र लिया। विशेषज्ञों ने बताया कि IRINS (Indian Research Information Network System) के माध्यम से शोधकर्ता अपनी प्रोफाइल को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित कर सकते हैं, जिससे उनके कार्यों की 'साइटेशन' और दृश्यता बढ़ती है। उन्होंने ORCHID ID और VARDHAN ID को अनिवार्य बताते हुए कहा कि ये डिजिटल पहचान शोधकर्ताओं को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करती हैं, जिससे समान नाम वाले लेखकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होती। सत्र में SHERNI (She Research Network India) पोर्टल के बारे में विस्तार से बताया गया, जो विशेष रूप से महिला वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के डेटाबेस को एकीकृत करने के लिए बनाया गया है।  

विशेषज्ञों ने शोध पत्रों के प्रकाशन की प्रक्रिया में DOI (Digital Object Identifier) की भूमिका को स्पष्ट करते हुए बताया कि कैसे एक स्थायी लिंक शोध कार्य की प्रामाणिकता और खोज क्षमता को बढ़ाता है। उन्होंने शोधार्थियों को प्रीडेटरी जर्नल्स (नकली पत्रिकाओं) से बचने और यूजीसी केयर लिस्ट की पत्रिकाओं में ही प्रकाशन करने की सलाह दी। सत्र के अंत में संकाय सदस्यों के लिए एक ज्ञानवर्धक क्विज़ का आयोजन किया गया, जिसके बाद सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। संचालन डॉक्टर शिवांगी तिवारी एवं गुरदीप त्रिपाठी ने किया। आभार मोक्ष एवं स्वयं की कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर काव्या दुबे ने किया इस आयोजन में , डॉ. नूपुर गौतम, डॉ. ममता सिंह, प्रो. सी.बी. सिंह, प्रो. अवनीश कुमार, प्रो. शिव कुमार, दुबे, डॉ. अनु सिंगला, प्रशांत शर्मा, कृष्णकांत और अभिनव सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों का सक्रिय सहयोग रहा।

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