सफर बना वसूली तंत्र का अड्डा
ट्रेन के भीतर वसूली का मामला सामने
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । चित्रकूट से गुजरती ट्रेन संख्या 12535 गरीब रथ एक्सप्रेस में जो कुछ सामने आयाए वह केवल एक घटना नहींए बल्कि उस सच्चाई का आईना है जिसमें रेल व्यवस्था के नियम बिखरते नजर आते हैं और रेट कार्ड का एक अनकहा कानून डिब्बों के भीतर लागू होता दिखाई देता है। कई दिनों से यात्रियों द्वारा लगातार दी जा रही सूचनाओं के बाद जब हमारे संवाददाता ने मंगलवार को स्वयं इस व्यवस्था की हकीकत परखने का निर्णय लियाए तो जी11 कोच की साइड लोअर सीट संख्या 79 से शुरू हुआ संवाद सीधे एक संगठित अवैध वसूली तंत्र तक जा पहुंचा। टीटीई शुक्ला ने बिना किसी हिचक के अपना रेट चार्ट खोला और बताया कि चित्रकूट से
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| ऑनलाइन दो सौ रुपए की पेमेंट रसीद |
लखनऊ तक 1500 रुपयेए कानपुर तक 1000 रुपये और बांदा तक 500 रुपये देने होंगेए जिसे उसने प्रीमियम रेट का नाम दिया और सीटों की कमी का हवाला देकर जायज ठहराने की कोशिश की। लेकिन जब संवाददाता ने नियमों के तहत सामान्य टिकट बनाने की बात कहीए तो हालात अचानक बदल गए और टीटीई ने दबंग अंदाज में 5000 रुपये की मांग कर दी। इसके बाद घटनाक्रम ने और गंभीर मोड़ लियाए जब टीटीई के इशारे पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। सिपाही रविशरण सिंह अपने अन्य साथी के साथ आए और सीधे हस्तक्षेप करते हुए वसूली को अंजाम तक पहुंचाया। अंततः संवाददाता से 800 रुपये नकद और 200 रुपये ऑनलाइन वसूले गएए जिसमें
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| रेलमदद पर कम्पलेंट क्लोज करने का जवाब |
ऑनलाइन भुगतान कोच अटेंडेंट के खाते में कराया गया। चित्रकूट से भरतकूप स्टेशन के बीच घटित यह पूरी घटना न केवल नियमों को तार.तार करती हैए बल्कि व्यवस्था और जवाबदेही पर गहरा प्रश्नचिह्न भी लगाती है। रेलमदद पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी केवल औपचारिक जवाब मिलना इस पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बना देता हैए मानो व्यवस्था स्वयं इस रेट कार्ड सिस्टम के सामने मौन हो चुकी हो। पौर्टल में कहा कि जिम्मेदार शिकायत भेजी गई है और जांच की जा रही है



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