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Tuesday, April 14, 2026

अपात्रों को लाभ और पात्रों को दर-दर की ठोकर

सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा जरूरतमंदों को

क्या नेपाल की तर्ज में सुधार करना होगा यूपी सरकार को

बांदा, के एस दुबे  । अपात्रों को लाभ और पात्रों को दर-दर की ठोकर खाना शायर उत्तर प्रदेश के वाशिन्दों का नसीब बन चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सैकड़ों कल्याणकारी योजनायें संचालित की जा रही है, जिससे गरीब, बेसहारा, वृद्ध महिला, पुरुषों के जीवन स्तर में बदलाव किया जा सके। सरकारी नुमाइंदों की लूट खसोट वाली नीति के चलते अपात्रों को तो भरपूर लाभ मिल रहा है, शहर की कांशीराम कालोनियां हो या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ अगर सही तरीके से इन योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच कर ली जाएं तो सैकड़ों की तादाद में कई ऐसे चेहरे सामने आ जायेंगे जो आये दिन सोशल मीडिया के फोटोफेम बने रहते हैं।


गौरतलब हो कि सरकारी सिस्टम की पोल खोलती नीति को अगर देखना है तो महज मर्का थाना क्षेत्र के ग्राम सांडा की रहने वाली विधवा रमदईया के हालात जान लीजिए। यूं तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को ढाई लाख रूपये का अनुदान दिया जा रहा है ताकि वह एक अच्छा सा मकान बनाकर अपना गुजर बसर कर सके। धूप, गर्मी और बरसात से खुद को व अपने परिवार को बचा सके, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकारी की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर गरीब बेसहारा लोगों को न मिलकर रसूक रखने वाले लोगों कर जेबों में सरकारी योजनाओं का लाभ समाता चला जा रहा है। रमईया ने मीडिया के सामने बताया कि आज तक उसको सरकारी आवास योजना के नाम पर एक भी मदद नहीं मिली। गर्मी,बरसात या फिर ठण्ड के मौसम में इसी झोपड़ी के भीतर रहकर गुजर करना पड़ता है। बरसात में कई बार आंधी-पानी में यह झोपड़ी टूटकर बिखर जाती है, फिर हम लोग इसको तैयार करके गुजर बसर करना शुरू कर देते हैं।

सत्ता के सिंहासन में बैठे सत्तासीन नेताओं और जनपद में सरकारी योजनाओं का संचालन कर रही अफसरशाही के सामने रमदईया का गुस्सा जायज नजर आ रहा है। रमदईया की माने तो उसका कहना है कि जब चुनाव आता है तो हमारे पास लोग वोट लेने जरूर आते है, तमाम आश्वासन की बूटी पिलाकर हमसे वोट लेकर दोबारा झांकने तक नहीं आते। वहीं शहर के कुछ गणमान्य लोगों ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर कई खट्टे-मीठे अनुभव साझा किये। उनका कहना है कि उप्र सरकार को पडोसी देश नेपाल की सरकार से कुछ सीखना चाहिये। वीआईपी कल्चर को छोड़कर सीधे गरीबों के घर तक पहुंचकर उनकी मदद करना चाहिये, ताकि सरकार को गरीबों की वास्तविक स्थिति का अंदाजा हो सके और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों के हांथों तक पहुंच सके।


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