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Tuesday, April 7, 2026

वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों पर बुन्देलखंड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

कुलपति प्रो. मुकेश पांडे बोले- सस्टेनेबल लाइफस्टाइल से बनेगा स्वस्थ भारत

उत्तर प्रदेश, झांसी। विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल) के अवसर पर बुन्देलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में '21वीं सदी में वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियां' विषयक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का भव्य आयोजन किया गया।  इस सेमिनार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर वैश्विक महामारी, जलवायु परिवर्तन तथा स्वास्थ्य असमानताओं से निपटने की रणनीतियों पर गहन चर्चा कराई।  कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडे ने कहा कि भारत आज आर्थिक प्रगति के पथ पर अग्रसर है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रॉपर लाइफस्टाइल, गुड हेल्थ हैबिट्स, प्रॉपर थिंकिंग तथा वर्क के साथ सस्टेनेबल लाइफस्टाइल और ग्रोथ पर ध्यान देना आवश्यक है।  कुलपति ने क्वालिटी ऑफ लाइफ, ओजोन प्रदूषण, कार्बन एमिशन की चर्चा करते हुए युवाओं को स्वस्थ खाद्य पदार्थ ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। 


कुलसचिव श्री ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य दिव्यस की शुरुआत 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की स्थापना के साथ हुई।  उन्होंने कहा कि इस वर्ष की थीम 'टुगेदर फॉर हेल्थ, स्टैंड विद साइंस' है।  उन्होंने फूड हाइजीन, क्लाइमेट चेंज तथा प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर अपने विचार रखे।  परीक्षा नियंत्रक श्री राज बहादुर ने कहा कि मानव विकास की यात्रा हजारों वर्षों से चली आ रही है, लेकिन आज स्वास्थ्य बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने बैलेंस्ड डाइट का उपयोग करते हुए शारीरिक गतिविधियां बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। 

मुख्य अतिथि पूर्व आयुक्त श्री पवन कुमार सिंह ने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिसीजेज 40 वर्ष से ऊपर के लोगों में तेजी से फैल रही हैं।  हमें दवाओं के भरोसे न रहकर प्राकृतिक तरीकों को अपनाना होगा। पूर्व विभागाध्यक्ष एमएलबी मेडिकल कॉलेज डॉ. दिनेश प्रताप ने चिंता जताई कि आज स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता से हट गया है। त्वरित लाभ व सुख के चक्कर में हम अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। मुख्य वक्ताओं में डॉ. मारिया एमिलिया (फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ साओ मेनास, ब्राजील), डॉ. वीटा मेयलिना (इंडोनेशिया), प्रो. डी. कुमार जय (एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी, चितवन, नेपाल), डॉ. रवीन्द्रन विवेकानंदन (ओपन यूनिवर्सिटी, श्रीलंका) शामिल हुए। इन्होंने महामारी, जलवायु परिवर्तन तथा स्वास्थ्य असमानताओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रो. ए.के. श्रीवास्तव (चीफ एडिटर, फ्लोरा एंड फॉना मैगजीन), डॉ. सी.एल. बघेल (बायोलॉजिस्ट), प्रो. ए.के. सिंह, प्रो. जे.पी. त्रिपाठी, प्रो. पी.सी. सिंघल, डॉ. योगेश पांडे (बीबीसी), डॉ. सुरेंद्र श्रीवास्तव (बीईआईटी), डॉ. डी.एस. गुप्ता (जिला अस्पताल), डॉ. प्रदीप यादव (जिला अस्पताल), डॉ. बलबीर सिंह (बायो मेडिकल साइंस) ने भी विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का संचालन सह-आयोजन सचिव डॉ. पूनम मेहरोत्रा एवं डॉ. सत्यवीर सिंह ने किया। आभार आयोजन सचिव डॉ. सत्यवीर सिंह ने ज्ञापित किया। सह-संयोजक डॉ. सचिन उपाध्याय, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. रवि कुमार, डॉ. राजेश वर्मा, डॉ. शुभांगी निगम, डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव, डॉ. पी.के. सिंह, डॉ. बृजेंद्र कश्यप, डॉ. धर्मेंद्र मणि त्रिपाठी, डॉ. कौशल त्रिपाठी उपस्थित रहे। छात्रों में लाखन सिंह, सोनम यादव, सोनम योगी, खुशी पाठक, लवी यादव, रेखा ने सहयोग किया।

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