बांदा, के एस दुबे । जनपद के यमुना पट्टी क्षेत्र में बाढ़ और कटान को रोकने के लिए बनाई गई 33 करोड़ रुपये की स्टोन पिचिंग एक साल के भीतर ही धराशायी हो गई है। इस मामले में अब घटिया निर्माण और भारी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। श्गंगा समग्रश् के पदाधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।यमुना नदी के किनारे स्थित इछावर, बसुधरी और लासडा गांवों को बाढ़ के प्रकोप से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा करोड़ों की लागत से स्टोन पिचिंग का कार्य कराया गया था। स्थानीय लोगों और गंगा समग्र की टीम का आरोप है कि निर्माण के दौरान मानकों की जमकर अनदेखी की गई। बड़े पत्थरों के स्थान पर छोटे-छोटे पत्थरों का प्रयोग किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पिचिंग में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं और वह पानी के बहाव में
बह गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए गंगा समग्र के जिला संयोजक महेश कुमार प्रजापति ने अपनी टीम के साथ ग्राम पंचायत इछावर का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि स्टोन पिचिंग पूरी तरह से बह चुकी है। उन्होंने सीधे तौर पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने का आरोप लगाया।
जिला संयोजक महेश कुमार प्रजापति ने कहा कि यह एक बड़ा घोटाला है। अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना घटिया काम संभव नहीं है। इसमें बड़े पत्थरों का प्रयोग न के बराबर किया गया, जिससे यह पहली बाढ़ भी नहीं झेल सकी।निर्माण कार्य के ध्वस्त होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश और भय है। महेश कुमार प्रजापति ने आगाह किया कि यदि इस साल यमुना में बाढ़ आती है, तो इछावर और आसपास के गांवों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। पिचिंग न होने से कई घर उजड़ सकते हैं और करोड़ों का जान-माल का नुकसान हो सकता है। गंगा समग्र ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर निष्पक्ष जांच करवाई जाए। दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में सरकारी धन की ऐसी बंदरबांट न हो और आम जनमानस की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


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