अब महिला डॉक्टर भी नहीं सुरक्षित
चित्रकूट में कानून का डर खत्म?
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में इन दिनों एक सवाल सड़कों से लेकर सरकारी गलियारों तक तैर रहा है कि आखिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के ऊंचे नारों और डबल इंजन सरकार के दावों के बीच जिले में महिलाओं के खिलाफ भय और असुरक्षा का यह माहौल क्यों गहराता जा रहा है? सत्ता के मंचों से महिला सम्मान की बातें होती हैं, योजनाओं के पोस्टर चौराहों पर चमकते हैं, नारी शक्ति या शक्ति दीदी के नाम पर नामी नेता दिखाई देते हैं लेकिन जमीनी तस्वीर बार-बार उन दावों को कठघरे में खड़ा करती दिखाई दे रही है। कभी किसी भाजपा नेता या उसके करीबी पर उत्पीड़न के आरोपों के बीच कोई महिला आत्महत्या कर लेती है, तो कभी किसी दलित छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत जिले को झकझोर देती है। आए दिन महिलाओं, छात्राओं और कमजोर वर्ग की बेटियों
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| बेटी बचाओ बेटी बढाओ का नारा |
के साथ शोषण, धमकी और दबंगई की खबरें सामने आ रही हैं। अब हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि समाज का सबसे शिक्षित और सम्मानित वर्ग माने जाने वाले डॉक्टर भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। तरौंहा के आरोग्य केंद्र में तैनात एक महिला डॉक्टर को दिनदहाड़े कथित रूप से उठा ले जाने की धमकी मिलती है। आरोप है कि सरकारी रौब और सत्ता की धौंस दिखाते लोग अस्पताल तक पहुंच जाते हैं, स्टाफ को डराते हैं और महिला चिकित्सक इतनी भयभीत हो जाती हैं कि फोन तक उठाने से डरने लगती हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि यदि एक उच्च शिक्षित महिला डॉक्टर खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, तो गांव-कस्बों की सामान्य बेटियों का मनोबल किस हाल में होगा? उधर पुलिस की तरफ से हर बार वही पुराना जवाब सुनाई देता है कि जांच जारी है। मगर जनता पूछ रही है कि आखिर यह जांच कब कार्रवाई में बदलेगी और क्या जिले में कानून का डर वापस कभी लौटेगा?


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