24 घंटे में गरीब गिरफ्तार, संत फरार
क्या सत्ता का साया बना ढाल?
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में एक विवादित संत की गिरफ्तारी को लेकर उठ रही मांगों ने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के बड़े-बड़े नेता, जनप्रतिनिधि और कई प्रभावशाली संगठन लगातार सक्रिय हैं- कभी ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं, तो कभी कर्वी कोतवाली और एसपी कार्यालय में गुहार लगाई जा रही है। लेकिन इन तमाम कोशिशों के बावजूद न तो संत सामने आ रहा है और न ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर पा रही है। सवाल है कि आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है जो कार्रवाई को रोक रही है? मजे की बात यह है कि इसी जिले में एक छोटे से मामले में, जब एक आम व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर पूर्व विधायक के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, तब पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर उसे गिरफ्तार कर नेता के सामने पेश कर
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| गिरफ्तार की मांग करती पीडिता अर्चना उपाध्याय |
दिया था। उस समय न तो धाराओं की कमी का बहाना बना और न ही किसी प्रक्रिया में देरी हुई। लेकिन अब जब बात एक विवादित संत की है, तो जिम्मेेदार कहते नजर आ रहे है कि गिरफ्तारी के लिए उपयुक्त धाराएं नहीं बन रहीं। यह विरोधाभास आम जनता के मन में कई सवाल खड़े करता है। क्या कानून का पैमाना व्यक्ति की हैसियत देखकर तय होता है? या फिर इस संत को किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण का कवच मिला हुआ है? चर्चा यह भी है कि अगर ऐसा संरक्षण न होता, तो अब तक यह मामला सड़कों पर खुलकर सामने आ चुका होता। दबे मुंह से कुछ लोग कह रहे है कि जिले के ही एक बडे नेता ने संरक्षण दे रखा है। फिलहाल, पुलिस की चुप्पी और संत की गैरमौजूदगी पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा रहस्यमय बना रही है।


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