बच्चों की कमी ने बढ़ाई चिंता
मंत्री पहुंचे स्कूल, हकीकत आई सामने
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि । जिले में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उस समय सामने आ गई जब जिले के प्रभारी मंत्री मन्नू लाल कोरी ने पुरानी बाजार स्थित संत तुलसी बाल विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। बिना किसी पूर्व सूचना के पहुंचे मंत्री ने सबसे पहले मिड डे मील की गुणवत्ता और व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। रसोईघर की साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता और बच्चों को परोसे जा रहे खाने को लेकर उन्होंने संबंधित कर्मियों से सीधे सवाल किए। इसके बाद मंत्री ने विद्यालय में संचालित स्मार्ट क्लास का निरीक्षण किया और डिजिटल शिक्षा की वास्तविक स्थिति को परखा। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से सीधे संवाद किया और उनके पठन-पाठन स्तर को जांचा। बच्चों से पूछे गए सामान्य सवालों के जवाबों के आधार पर उन्होंने शिक्षण गुणवत्ता का
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| विद्यालय परिसर में रखे हुए सिलेण्डर |
आकलन किया। हालांकि इस दौरान एक चौंकाने वाली स्थिति तब सामने आई जब विद्यालय में बच्चों की संख्या अपेक्षा से काफी कम पाई गई। इस पर मंत्री ने संबंधित शिक्षक से स्पष्टीकरण मांगा और नामांकन तथा उपस्थिति में गिरावट के कारणों की जानकारी ली। मंत्री के अचानक निरीक्षण से विद्यालय प्रबंधन और स्टाफ में हड़कंप मच गया। कई शिक्षक और कर्मचारी व्यवस्था दुरुस्त करने में जुटे नजर आए। निरीक्षण के बाद मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि शिक्षा और पोषण योजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से बच्चों तक पहुंच सके।
स्कूल बना गैस सिलेंडर गोदाम? जांच की मांग
पुरानी बाजार स्थित संत तुलसी बाल विद्यालय को लेकर स्थानीय निवासी राजेंद्र सोनी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के पति कैटरिंग का व्यवसाय करते हैं और विद्यालय परिसर का उपयोग कथित तौर पर गोदाम के रूप में किया जा रहा है। आरोप है कि कैटरिंग में उपयोग होने वाले गैस सिलेंडरों को विद्यालय परिसर में लाकर रखा जाता है और उनमें बची हुई गैस की रीफिलिंग/रीसेलिंग भी यहीं की जाती है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस संबंध में कुछ प्रमाण भी उन्होंने उपलब्ध कराए हैं। राजेंद्र सोनी ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि विद्यालय परिसर के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आ सके।
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