बांदा, के एस दुबे । गैंगस्टर कोर्ट ने एक दशक से भी अधिक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए तीन शातिर अपराधियों को सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाल सिंह की अदालत ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर दोषियों को एक-एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि 14 जून 2014 को जनपद बांदा के बिसंडा थाना में तत्कालीन थाना प्रभारी अमर सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन अभियुक्तों का एक
संगठित गिरोह था, जिसका सरगना कुलदीप था और बाकी दोनों उसके सक्रिय सदस्य थे। यह गिरोह संगठित रूप से अपराध कर आर्थिक और भौतिक लाभ अर्जित करने का अभ्यस्त था। इनके खिलाफ पूर्व में भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे, जिसके आधार पर गैंग चार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई थी।
इस गिरोह की आपराधिक गतिविधियों के कारण क्षेत्र में दहशत का माहौल बना रहता था। आम जनता इनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने या कोर्ट में गवाही देने से भी डरती थी। मामले की विवेचना तत्कालीन निरीक्षक हरिशरण सिंह यादव द्वारा की गई, जिन्होंने सभी दस्तावेजी साक्ष्य, एफआईआर और सामान्य डायरी संकलित कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। 25 जून 2015 को कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 6 महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। अभियोजन विभाग द्वारा समयबद्ध तरीके से की गई प्रभावी पैरवी और समन्वय के कारण कोर्ट ने अपने 32 पन्नों के विस्तृत फैसले में तीनों को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया। इस महत्वपूर्ण मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह, पैरोकार सतीश कुमार और कोर्ट मोहर्रिर राकेश सिंह तोमर ने बेहद प्रभावी पैरवी की, जिससे अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जा सका।


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