बाँदा, के एस दुबे । जनपद में लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण हीट वेव की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी अमित आसेरी के अनुरोध पर शासन स्तर से छह वैज्ञानिकों की विशेषज्ञ टीम जनपद पहुँची है। यह टीम आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक, उपग्रह चित्रों तथा वैज्ञानिक आंकड़ों के माध्यम से हीट वेव एवं लू के वास्तविक कारणों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
अध्ययन के प्रमुख उद्देश्य एवं बिंदु:
- भूमि सतह तापमान का विश्लेषणउपग्रह आंकड़ों के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहाँ भूमि का तापमान सर्वाधिक दर्ज हो रहा है।
- अत्यधिक गर्म क्षेत्रों का वैज्ञानिक मानचित्रण किया जाएगा।
- हरियाली एवं वन क्षेत्र का मूल्यांकन
- वृक्षों की संख्या, वन क्षेत्र में हुए परिवर्तनों तथा हरित आवरण की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।
- तापमान वृद्धि और हरियाली की कमी के बीच संबंधों का विश्लेषण किया जाएगा।
- जल स्रोतों की भूमिका का अध्ययन
- तालाबों, नदियों, जलाशयों एवं भूजल स्तर की वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाएगा।
- यह जांचा जाएगा कि नमी की कमी किस प्रकार तापमान वृद्धि को प्रभावित कर रही है।
- भौगोलिक एवं प्राकृतिक कारकों की समीक्षा
- बुंदेलखंड की चट्टानी भूमि, कम आर्द्रता, खुले भूभाग तथा गर्म हवाओं की दिशा एवं प्रवाह का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा।
- क्षेत्रीय भौगोलिक परिस्थितियों का हीट वेव पर प्रभाव निर्धारित किया जाएगा। शहरीकरण एवं मानवीय गतिविधियों का प्रभाव सड़कों, कंक्रीट संरचनाओं, निर्माण गतिविधियों एवं धूल प्रदूषण के कारण उत्पन्न होने वाले "हीट आइलैंड प्रभाव" का अध्ययन किया जाएगा।
- स्थानीय स्तर पर तापमान वृद्धि में मानवीय गतिविधियों की भूमिका का आकलन किया जाएगा।
अध्ययन से अपेक्षित लाभ
वैज्ञानिक यह निर्धारित करेंगे कि बाँदा में तापमान वृद्धि केवल मौसमी कारणों से हो रही है अथवा स्थानीय परिस्थितियाँ भी इसे अधिक गंभीर बना रही हैं। अध्ययन के लिए पुराने तापमान रिकॉर्ड, मौसम संबंधी आंकड़े तथा वर्तमान उपग्रह डेटा का समन्वित विश्लेषण किया जाएगा।अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर जनपद में प्रभावी हीट एक्शन प्लान, वृहद पौधरोपण अभियान, जल संरक्षण उपाय, छायादार क्षेत्रों का विकास तथा गर्मी से बचाव हेतु दीर्घकालिक रणनीतियाँ तैयार की जा सकेंगी। यह अध्ययन भविष्य में संपूर्ण बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए हीट वेव प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूलन का एक प्रभावी मॉडल सिद्ध हो सकता है। जनपद में तापमान कई बार 48 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया जा चुका है। ऐसे में यह वैज्ञानिक अध्ययन स्थानीय कारणों की पहचान कर प्रभावी समाधान विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
जनपद- में स्थानीय पर्यावरणीय कारकों के फील्ड अध्ययन का कार्य दिनांक 16.06.2026 से 19.06.2026 के मध्य प्रस्तावित है, जिस हेतु इस केन्द्र से परियोजना वैज्ञानिक डा० हफीजुल्लाह एवं श्री अभिषेक गोंड उक्त अवधि में जनपद-बांदा में रहकर परियोजना फील्ड कार्य सम्पादित करेगें तथा उक्त अवधि के फील्ड कार्य हेतु बांदा जनपद के खनन अधिकारी को भी इस केन्द्र में उक्त परियोजना वैज्ञानिकों का सहयोग करने हेतु निर्देशित किया।


No comments:
Post a Comment