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Saturday, June 27, 2026

बंधुआ बनाए गए 58 मजदूर मुक्त, यूपी-एमपी के बच्चे और महिलाएं भी शामिल

असंगठित मजदूर मोर्चा के हस्तक्षेप पर कार्रवाई

बांदा, के एस दुबे । असंगठित मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार के हस्तक्षेप के बाद हिसार जिला प्रशासन ने हरियाणा के खरड़ स्थित शिव ईंट भट्ठे से 58 बाल एवं बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया। ये मजदूर यूपी के बांदा, चित्रकूट और एमपी के पन्ना जिले के रहने वाले हैं। सभी अनुसूचित जाति से हैं और इनमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल हैं। मोर्चा के अनुसार, सितंबर 2025 में जमादार राहुल के जरिए पेसगी देकर इन परिवारों को 650 रुपये प्रति हजार ईंट के लालच में ट्रक से हिसार लाया गया था। भट्ठा मालिक कुलदीप व शनि ने 8 महीने काम कराने के बाद मजदूरी नहीं दी। 9 जून 2026 से मजदूरों को भट्ठे पर ही बंधक बनाकर रखा गया। मांगने पर धमकाया गया


और उल्टा मजदूरों पर ही मारपीट का केस दर्ज करा दिया गया। 22 जून को जानकारी मिलने पर मोर्चा ने लेबर डेवलेपमेंट फाउंडेशन के साथ मजदूरों से संपर्क किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने 22-23 जून को हरियाणा, यूपी, एमपी के मुख्य सचिव, श्रम आयुक्त, डीएम, एसपी और मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजे। 24-25 जून को स्मरण पत्र भेजने और अधिकारियों से बात के बाद हिसार प्रशासन ने टीम गठित कर मजदूरों को मुक्त कराया।

मोर्चा का आरोप है कि प्रशासन ने आधी-अधूरी मजदूरी दिलाकर, बिना बयान लिए और बिना मुक्ति प्रमाण पत्र दिए मजदूरों को छोड़ा। मजदूरों से ही ट्रक का किराया भी वसूला गया। 27 जून को सभी मजदूर बांदा, चित्रकूट और पन्ना पहुंचे। दल सिंगार ने कहा कि बेरोजगारी और पलायन की वजह से मजदूर बंधुआ बनने को मजबूर हैं। स्थानीय रोजगार न होने से लाखों लोग शोषण झेल रहे हैं। लेबर डेवलेपमेंट फाउंडेशन के भगवानदास सिंह यादव ने मुक्त मजदूरों के तत्काल पुनर्वास की मांग की। मुक्त कराए गए 58 मजदूरों में बांदा के मुंगूस, तेरहीमाफी, प्रेमपुर, पुनाहूर, बरुआ, साथी, पाराबिहारी; चित्रकूट के भैंसौंधा; और पन्ना के हीरापुर, नयागांव के परिवार शामिल हैं।


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