भाई को बचाने दौड़ी बहन, फिर भांजा भी कूद पड़ा
जसपुरा/बांदा, के एस दुबे । सोमवती अमावस्या के दिन जिस घर में पूजा-पाठ और खुशियों का माहौल होना था, वहां कुछ ही पलों में चीख-पुकार और मातम छा गया।चंद्रावल नदी में डूब रहे छोटे भाई को बचाने के लिए 14 वर्षीय बहन ने बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में छलांग लगा दी।बहन को संघर्ष करता देख 12 वर्षीय भांजा भी मदद के लिए पानी में उतर गया।लेकिन नदी की तेज धार और गहराई ने तीनों मासूमों को अपनी आगोश में ले लिया। गौरी कलां गांव के सिद्धबाबा मंदिर के पास सोमवार सुबह यह दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। रमाशंकर विश्वकर्मा के बेटे अंश (10),बेटी माधुरी (14),बड़े बेटे सिद्धार्थ और रिश्ते में भांजे प्रतीक (12) मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए गए थे।किसी को क्या पता था कि घर से हंसते-खेलते निकले ये बच्चे कभी वापस नहीं लौटेंगे।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पूजा से पहले चारों बच्चे नदी किनारे स्नान कर रहे थे।तभी अचानक अंश का पैर फिसल गया और वह
गहरे पानी में चला गया।छोटे भाई को डूबता देख बहन माधुरी एक पल भी नहीं रुकी।उसने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी।बहन को पानी में संघर्ष करता देख भांजा प्रतीक भी दोनों को बचाने के लिए कूद पड़ा।लेकिन तीनों नदी की गहराई और तेज बहाव में फंस गए।मौके पर मौजूद सिद्धार्थ की आंखों के सामने उसका भाई,बहन और भांजा पानी में डूबते चले गए।वह मदद के लिए चीखता रहा,दौड़ता रहा,लेकिन नदी की लहरें उससे कहीं ज्यादा तेज थीं।उसकी चीखें सुनकर ग्रामीण दौड़े,मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी।ग्रामीणों और गोताखोरों ने करीब दो घंटे तक नदी में तलाश अभियान चलाया।जब तीनों बच्चों को बाहर निकाला गया तो परिजनों की उम्मीदें अभी भी जिंदा थीं।एंबुलेंस से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसपुरा ले जाया गया,लेकिन डॉक्टरों ने देखते ही तीनों को मृत घोषित कर दिया।यह सुनते ही अस्पताल परिसर में ऐसा कोहराम मचा कि वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं तीनों बच्चों की मौत की खबर सुनकर पूरा गौरी कलां गांव सिसक उठा।मां सुनैना अपने बेटे और बेटी के शवों से लिपटकर बार-बार बेहोश हो रही थीं।उनकी दर्द भरी चीखें सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा।पिता रमाशंकर की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।घर का आंगन, जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं,वहां सिर्फ मातम और सन्नाटा पसरा था।मृतक प्रतीक की मां स्नेहा भी अपने बेटे का चेहरा देखकर बिलख उठीं।जिस बेटे को उन्होंने सुरक्षित भविष्य के सपने के साथ मायके में रखा था,उसकी अर्थी को कंधा देने की नौबत आ जाएगी, यह किसी ने नहीं सोचा था।गांव के बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा हृदय विदारक दृश्य बहुत कम देखा है।एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।शाम को जब पोस्मार्टम के बाद गांव से तीन अर्थियां एक साथ निकलीं तो हर आंख नम थी।किसी के पास शब्द नहीं थे, सिर्फ आंसू थे और एक सवाल क्या नदी में डूबते भाई को बचाने निकली बहन और उनकी मदद को कूदे भांजे की कुर्बानी को कभी भुलाया जा सकेगा? वहीं जैसे ही पूर्व विधायक दलजीत सिंह को घटना की जानकारी हुई उन्होंने फोन के माध्यम से अपने छोटे भाई नंदू सिंह को पीड़ित परिजनों से मिलकर हर संभव मदद करने को कहा है।


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