कबीर आश्रम नौगवां में उत्तराधिकार को लेकर गहराया विवाद - Amja Bharat

Amja Bharat

All Media and Journalist Association

Breaking

Thursday, June 25, 2026

कबीर आश्रम नौगवां में उत्तराधिकार को लेकर गहराया विवाद

साधुओं ने डीएम से लगाई गुहार; लगाया फर्जी दस्तावेज और लूटपाट का आरोप

बांदा, के एस दुबे । जनपद के नौगवां स्थित प्रसिद्ध 1008 श्री शीतलदास साहब कबीर आश्रम के उत्तराधिकार को लेकर विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है। आश्रम के साधुओं ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी  को एक शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपा है। साधुओं का आरोप है कि दिवंगत महंत के फर्जी दस्तावेज तैयार कर आश्रम पर अवैध कब्जा किया गया है और वहां भारी लूटपाट व फायरिंग की घटनाओं को अंजाम दिया गया है। शिकायती पत्र के अनुसार, कबीर आश्रम नौगवां के महंत मोहनदास साहब का लंबी बीमारी के बाद 20 फरवरी 2026 को निधन हो गया था। आश्रम में उनके साथ कोठारी पुजारीदास साहब, गोपालदास साहब, रामबाबू साहब और गौरीदास


साहब रहते थे। महंत मोहनदास ने अपने जीवनकाल में 30 जनवरी 2026 को बांदा में इलाज के दौरान पुजारीदास साहब के नाम असली उत्तराधिकार पत्र बनवाया था। महंत के निधन के बाद कुछ रसूखदार लोगों ने तत्कालीन एसडीएम नरैनी और थानाध्यक्ष कालिंजर की कथित साठगांठ से मध्य प्रदेश के रविशंकर द्विवेदी के नाम 21 जनवरी 2026 का एक फर्जी उत्तराधिकार पत्र तैयार करवा लिया। इसी फर्जी दस्तावेज के बल पर असली उत्तराधिकार पत्र को छिपा दिया गया और आश्रम पर जबरन कब्जा कर लिया गया।

साधुओं द्वारा जिलाधिकारी को दी गई शिकायत में आश्रम की संपत्ति को लेकर बेहद चौंकाने वाले दावे किए गए हैं जिसमें कहा गया है कि अवैध कब्जे के दौरान आश्रम में रखे कई किलो सोने-चांदी के आभूषण और लगभग 15 लाख नकद लूट लिए गए। आश्रम की 115 बीघे कृषि भूमि पर लगी फसल को जबरन कटवाकर बेच दिया गया। यही नहीं, बीते 23 जून 2026 को भी पुलिस की मौजूदगी में आश्रम का गल्ला चोरी कर बेच दिया गया और कमरों में जबरन ताले लटका दिए गए। साधुओं का कहना है कि विरोध करने पर 8 मार्च 2026 को आश्रम परिसर में दहशत फैलाने के उद्देश्य से फायरिंग भी की गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज साधुरू संतों का कहना है कि उन्होंने 23 फरवरी से 4 मई 2026 के बीच कई बार जिला प्रशासन व उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय स्तर पर फर्जी जांच रिपोर्ट भेजकर मामले को लगातार दबाया जा रहा है। थक-हारकर कलेक्ट्रेट पहुंचे साधुओं ने डीएम से न्याय की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे हैंरू 30 जनवरी 2026 के असली उत्तराधिकार पत्र की जांच कर आश्रम का वास्तविक कब्जा पुजारीदास साहब को दिलाया जाए।

आश्रम से लूटी गई नगदी, जेवरात व गल्ला वापस कराया जाए। फर्जीवाड़ा, लूट और फायरिंग करने वाले आरोपियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए। आश्रम की कृषि भूमि को भू-माफियाओं द्वारा जबरन जोतने-बोने पर तुरंत रोक लगाई जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित साधुओं ने इस प्रार्थना पत्र की एक प्रतिलिपि सूबे के मुख्यमंत्री को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी है। 25 जून 2026 को जिला प्रशासन द्वारा यह ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है, और अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रशासन की जांच और अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।


No comments:

Post a Comment

Post Bottom Ad

Pages