4 घंटे की जटिल सर्जरी कर बचाई मजदूर की जान
बांदा, के एस दुबे । रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक अद्भुत मिसाल पेश की है। मौत के मुंह में समा चुके एक 49 वर्षीय मजदूर को डॉक्टरों की टीम ने करीब 3 से 4 घंटे चली बेहद जटिल सर्जरी के बाद नया जीवन दे दिया है। मरीज का सीना, पसलियां, खाने की थैली, तिल्ली और बड़ी आंत समेत शरीर के कई अंदरूनी अंग आरा मशीन के ब्लेड से बुरी तरह कट चुके थे। डॉक्टरों के मुताबिक, बांदा के चिकित्सा इतिहास में आज तक इतनी बड़ी और जटिल सर्जरी कभी नहीं हुई थी। जानकारी के मुताबिक, बबेरू थाना क्षेत्र का रहने वाला कल्लू प्रजापति (49 वर्ष) पुत्र भदेदु पेशे से मजदूर है। बीते 2 जून को वह हाथ से चलने वाली आरा मशीन लेकर गांव में ही किसी के यहाँ पेड़ काटने गया था। इसी दौरान पेड़ काटते वक्त एक भारी डाल अचानक कल्लू के ऊपर गिर गई। डाल के दबाव से कल्लू चालू आरा मशीन सहित नीचे गिर पड़ा। इस खौफनाक हादसे में चालू
मशीन का ब्लेड कल्लू के पेट और सीने में गहरे तक उतर गया, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं तड़पने लगा। आनन-फानन में परिजन उसे बेहद गंभीर हालत में रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लेकर आए। मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर आर. सी. अरुण और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। डॉक्टरों ने लगातार 3 से 4 घंटे तक ऑपरेशन थिएटर में कड़ी मशक्कत की और एक-एक करके सभी अंगों को रिपेयर किया। पिछले आठ दिनों से आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा कल्लू अब पूरी तरह खतरे से बाहर है। बुधवार 10 जून को जब मरीज ने कुछ खाना-पीना शुरू किया, तब डॉ. आर. सी. अरुण ने इस ऐतिहासिक सफलता की जानकारी साझा की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, ष्मैं बांदा जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में पिछले 17-18 वर्षों से सर्जरी कर रहा हूँ। मेरे पूरे करियर में बांदा के भीतर इतनी बड़ी और क्रिटिकल सर्जरी कभी नहीं हुई। यह इस क्षेत्र की पहली सबसे बड़ी सफल सर्जरी है।
डॉ. अरुण ने बताया कि यदि यह ऑपरेशन किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में कराया जाता, तो मरीज के कई लाख रुपये खर्च हो जाते, जिसे वहन करना एक गरीब मजदूर के लिए नामुमकिन था। लेकिन मेडिकल कॉलेज में यह पूरी सर्जरी सिर्फ मामूली सरकारी फीस पर ही संपन्न हो गई। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर एस. के. कौशल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, यह सिर्फ बांदा ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अमूमन ऐसे मामलों में मरीजों को कानपुर या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है, लेकिन हमारे डॉक्टरों ने यहीं जान बचाई। यह हमारे कॉलेज के लिए गर्व की बात है।ष् उन्होंने डॉ. अरुण और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।


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