बांदा, के एस दुबे । बुंदेलखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाके इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। एक ओर सरकार 'हर घर नल से जल' योजना का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पूर्व में स्थापित 'स्वजल धारा कार्यक्रम' के तहत बने लाखों रुपये के सरकारी ट्यूबवेल प्रशासनिक लापरवाही के कारण कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई ट्यूबवेलों को प्रभावशाली लोगों और भू-माफियाओं ने निजी संपत्ति की तरह अपने कब्जे में ले लिया है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी सिंह पटेल व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रवीन्द्र नाथ गुप्ता ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में बबेरू, तिन्दवारी, जसपुरा और कमसिन जैसे ब्लॉकों का विशेष उल्लेख किया है, जहाँ वर्ष 2011 में ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ये ट्यूबवेल स्थापित किए गए थे।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित विभागों के पास इन ट्यूबवेलों का न तो कोई अद्यतन डेटाबेस है और न ही इनका कभी भौतिक ऑडिट कराया गया है। प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि किसी भी अधिकारी को यह तक नहीं पता कि वर्तमान में इनमें से कितने ट्यूबवेल चालू हैं और कितने बंद। सरकारी भूमि और मशीनों के इस तरह से निजी उपयोग को उन्होंने जनसंपत्ति का सीधा नुकसान बताया है।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें
सभी ब्लॉकों में स्थापित ट्यूबवेलों की वर्तमान स्थिति की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित हो। सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और ट्यूबवेल परिसरों को मुक्त कराया जाए , जो ट्यूबवेल मरम्मत योग्य हैं, उन्हें 'जल जीवन मिशन' या अन्य किसी योजना से जोड़कर पुनः चालू किया जाए। क्रियाशील ट्यूबवेलों की सूची संबंधित ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक की जाए, ताकि स्थानीय नागरिक इनकी देखरेख और निगरानी कर सकें।
रवीन्द्र नाथ गुप्ता ने बताया कि यदि सरकारी ट्यूबवेलों की सुध नहीं ली गई, तो यह क्षेत्र के निवासियों के 'स्वच्छ जल' के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा की है। ज्ञापन देने में महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष पिंकी प्रजापति , विकलांग प्रकोप जिलाध्यक्ष श्रीराम प्रजापति ,बिहारीलाल अनुरागी आदि लोग शामिल रहे।


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