बांदा, के एस दुबे । प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार, संगठन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को संबोधित एक 11 सूत्रीय मांग पत्र प्रभारी जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी कुमार धर्मेंद्र को सौंपा। एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव के.एस. दुबे, प्रदेश महासचिव नंदकिशोर शिवहरे और जिला अध्यक्ष प्रदीप सिंह गौतम के नेतृत्व में दर्जनों पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी आवाज बुलंद की। ज्ञापन के माध्यम से जिले, तहसील, ब्लॉक और ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकारों के लिए रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की गई है। संगठन ने अपेक्षा जताई है कि सरकार आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पूर्व कैबिनेट की बैठक बुलाकर
इन मांगों को तत्काल मंजूर करे। प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर विशेष कैंप लगाकर मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त, दोनों श्रेणियों के पत्रकारों व उनके परिवार के लिए 5 लाख रुपये का आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाए। फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के लिए 25 लाख रुपये के सामूहिक दुर्घटना बीमा की व्यवस्था हो। अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी 60 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों को 25 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पत्रकारों को 50 प्रतिशत की भारी छूट पर आवास आवंटित किए जाएं।एसोसिएशन ने फील्ड में काम करने वाले पत्रकारों के साथ होने वाले उत्पीड़न और फर्जी मुकदमों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
जिला व तहसील स्तर पर जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और एसोसिएशन के पदाधिकारियों को शामिल कर एक अस्थाई समिति का गठन किया जाए। किसी भी पत्रकार पर एफआईआर दर्ज होने से पहले इस समिति द्वारा निष्पक्ष जांच अनिवार्य हो। इस समिति में पेजा के जिला अध्यक्ष को भी नामित किया जाए। ज्ञापन में लखनऊ स्थित सचिवालय और लोक भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर लगी रोक को तत्काल हटाने की मांग की गई है। साथ ही, कथित व फर्जी संगठनों के कब्जे से प्रेस क्लबों को मुक्त कराकर वहां लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव कराने की बात कही गई है। इसके अलावा, विज्ञापन आवंटन में छोटे व मध्यम समाचार पत्रों के साथ हो रहे भेदभाव और कमीशनखोरी को तत्काल रोकने की मांग उठाई गई है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि सूचना विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त व गैर-मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची जिले, तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि काम के दौरान पत्रकारों को परेशानी न हो। साथ ही, पत्रकारिता की छवि खराब कर रहे कथित फर्जी पत्रकारों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से नरेंद्र सिंह, प्रमोद शुक्ला, संजय कुमार, हुकुम चंद्र सेठी, कामता प्रसाद, शुभम सिंह, प्रकाश गुप्ता, शिवकुमार सहित भारी संख्या में पत्रकार साथी मौजूद रहे।
मान्यता प्राप्त स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग सख्त
बांदा। प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन बेहद गंभीर है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा सभी अशासकीय प्राथमिक एवं जूनियर हाई स्कूलों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को छात्र-छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश का कड़ाई से अनुपालन न करने और बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संस्था प्रबंधक के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यदि पूर्व से संचालित किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय का भवन जर्जर अवस्था में है, जिससे बच्चों के जान-माल को खतरा हो सकता है, तो उसकी सूचना तत्काल विभाग को देनी होगी। ऐसा न करने पर पूरी जिम्मेदारी प्रबंध समिति की होगी। स्कूल प्रबंधन को हर दो साल की अवधि के भीतर अपने विद्यालय की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के क्रियाशील होने और स्कूल भवन के पठन-पाठन हेतु सुरक्षित होने का तकनीकी विशेषज्ञों से प्रमाण-पत्र लेकर विभाग को सौंपना होगा। तय समय में सर्टिफिकेट न देने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
जो स्कूल किराये के भवन में चल रहे हैं, उन्हें भवन स्वामी के साथ स्पष्ट शर्तों वाला एग्रीमेंट प्रपत्र हस्ताक्षरित कर जमा करना होगा। खेल के मैदान से लेकर क्लासरूम तक के लिए गाइडलाइंस ,विभाग ने छात्र-छात्राओं की दैनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित अहम निर्देश दिए ह कि स्कूल परिसर में अग्निशमन सुरक्षा मानकों के अनुसार उपकरण लगाए जाएं और निर्धारित समय पर उनकी जांच व रिफिलिंग अनिवार्य रूप से कराई जाए। खेल के मैदान में लगे झूले, रैम्प, पोल, बैडमिंटन कोर्ट और जिम्नास्टिक सामग्री की समय-समय पर मरम्मत कराई जाए। यदि कोई खेल सामग्री असुरक्षित या टूटी पाई जाती है, तो उसे तत्काल हटाकर नष्ट किया जाए। कक्षाओं में बच्चों के बैठने के लिए अच्छे फर्नीचर की व्यवस्था हो, जीर्ण-शीर्ण फर्नीचर का प्रयोग कतई न हो। प्रयोगशालाओं में प्रैक्टिकल केवल प्रशिक्षित शिक्षकों की निगरानी में ही कराए जाएं। विभागीय चेतावनीरू ष्छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वाेपरि है। इसमें किसी भी स्तर पर पाई गई शिथिलता, लापरवाही या उदासीनता अक्षम्य होगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य के विरुद्ध सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्वयं संस्था की होगी।


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