बांदा, के एस दुबे । विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर जनपद बांदा में बाल अधिकारों के लिए कार्यरत प्रमुख संस्था ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान ने पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर एक बड़े संयुक्त अभियान को अंजाम दिया। इस कार्रवाई के तहत विभिन्न कार्यस्थलों पर शोषण का शिकार हो रहे मासूम बच्चों को बाल मजदूरी के दलदल से मुक्त कराया गया। यह पूरी कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा जून महीने को बाल मजदूरी के खिलाफ एक्शन मंथ के रूप में मनाने के लिए जारी की गई अधिसूचना और दिशा-निर्देशों के तहत की गई है। सरकार के इन निर्देशों के अंतर्गत बाल श्रम की शिकायतों वाले चिन्हित इलाकों में सघन छानबीन करने और बच्चों को रेस्क्यू करने के लिए साझा अभियान चलाने का प्रावधान है।
मुक्त कराए गए बच्चों को बेहद शोषणकारी और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक परिस्थितियों में रखा गया था। मामूली पैसों की खातिर इन मासूमों से दिन-रात काम लिया जा रहा था, जिसका उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अत्यंत बुरा असर पड़ रहा था। संस्थान ने जानकारी दी कि बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराने के बाद, बाल श्रम कराने वाले जिम्मेदार तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही पीड़ित बच्चों को नियमानुसार पुनर्वास, मुआवजा और अन्य सरकारी सुविधाएं दिलाने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ-साथ ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान ने जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया। इस अभियान में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अफसरों, स्थानीय सामुदायिक नेताओं और ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बच्चों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।
इस सफल अभियान पर बात करते हुए ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान के निदेशक श्रवण कुमार ने कहा कि शोषण और मजदूरी से मुक्त कराए गए हर बच्चे के शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा और गरिमा की आज एक बार फिर बहाली हुई है। बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है। बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं, बल्कि स्कूल में है।उन्होंने आगे कहा कि चूंकि मानव तस्करी और बाल मजदूरी आपस में गहरे जुड़े हैं, इसलिए संस्था बच्चों को मुक्त कराने और उनके उचित पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन व पुलिस के साथ लगातार करीबी समन्वय बनाकर काम करती रहेगी।
गौरतलब है कि ग्रामीण परंपरा विकास संस्थान बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने वाले देश के सबसे बड़े नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क श्जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेनश् का एक सहयोगी संगठन है। इस नेटवर्क में देश भर के 250 से अधिक संगठन शामिल हैं। इस नेटवर्क के मजबूत खुफिया सूचना-साझाकरण तंत्र और आपसी सहयोग का ही नतीजा है कि अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच देश भर में 1.45 लाख से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग और बाल श्रम से मुक्त कराया जा चुका है। जून के इस श्एक्शन मंथश् में भी यह नेटवर्क दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ पर कड़ी नजर रख रहा है।


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