बांदा, के एस दुबे । टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। संगठन के पदाधिकारियों यूऔर शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1 सितंबर 2025 तथा पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में भविष्य को लेकर चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व में विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में बनाए गए पात्रता मानदंड लागू करना प्राकृतिक न्याय और विधिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ शिक्षक, शिक्षा और समाज के हितों के लिए निरंतर कार्य करता रहा है। संगठन का मानना है कि पूर्व से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपना अनुचित है। इस समस्या के समाधान के लिए महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है। प्रथम चरण में देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकारों को ज्ञापन भेजे जा रहे हैं।
महासंघ ने मांग की कि भारत सरकार संसद में आवश्यक विधायी संशोधन अथवा विशेष प्रावधान लाकर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी राहत प्रदान करे तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस को समाप्त करे। गुरुवार को अपराह्न 3:30 बजे जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित ज्ञापन कार्यक्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


No comments:
Post a Comment