आधुनिक खेती, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन के लिए मिल रहा है 1.50 लाख रुपए तक का भारी अनुदान
सीधा किसानों के खाते में पहुंचेगी राहत, 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर पारदर्शिता के साथ होगा चयन
खेती को मुनाफे का सौदा बनाने और स्वरोजगार के नए अवसर देने की दिशा में योगी सरकार का एक और ऐतिहासिक कदम
बांदा/हमीरपुर, के एस दुबे । उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों के आर्थिक उत्थान के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित 'अनुसूचित जाति/जनजाति कृषकों के आधुनिकीकरण विकास योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में हमीरपुर व बांदा जिले के SC/ST वर्ग के किसानों को विभिन्न उद्यानिकी और कृषि आधारित गतिविधियों पर भारी अनुदान दिया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
सब्जियों से लेकर मधुमक्खी पालन तक पर सब्सिडी
योगी सरकार की इस योजना के तहत किसानों को आधुनिक और नकदी फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत शंकर (हाइब्रिड) कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती, शंकर टमाटर, मसाला मिर्च, शंकर शिमला मिर्च, खरीफ प्याज, लहसुन उत्पादन, मधुमक्खी पालन, पावर टिलर (8 बीएचपी) और लो-कास्ट मशरूम उत्पादन इकाई की स्थापना के लिए मोटी रकम सब्सिडी के रूप में दी जा रही है। इसके अलावा पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए आईपीएम मॉडल को भी इस योजना में शामिल किया गया है।
सरकार दे रही है इन मदों में अनुदान
योगी सरकार किसानों को लागत का एक बड़ा हिस्सा अनुदान के रूप में वापस कर रही है। जिसमे सब्जियों की खेती में शंकर कद्दूवर्गीय सब्जियों, टमाटर, मसाला मिर्च और शिमला मिर्च की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 45,000 रुपए तक का अनुदान दिया जा रहा है वहीं लहसुन उत्पादन के लिए 75,000 रुपये और खरीफ प्याज की खेती के लिए 37,500 रुपए की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा कृषि यंत्र और रोजगार के अंतर्गत 8 बीएचपी के पावर टिलर की खरीद पर 75,000 रुपये तथा मधुमक्खी पालन के लिए 27,000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इज़के साथ ही लो-कास्ट मशरूम उत्पादन इकाई (200 वर्ग मीटर, न्यूनतम 250 बैग क्षमता) स्थापित करने के लिए सबसे बड़ा अनुदान 1.50 लाख रुपए तय किया गया है। वहीं आईपीएम मॉडल को अपनाने पर 3600 रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी।
पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा चयन
अधिकारियों के मुताबिक योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ 'प्रथम आवक-प्रथम पावक' (पहले आओ, पहले पाओ) के सिद्धांत पर दिया जाएगा और इच्छुक पात्र किसान उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dbt.uphorticulture.in पर जाकर तुरंत अपना ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय किसानों को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी (भू-अभिलेख) और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अधिक जानकारी के लिए किसान किसी भी कार्य दिवस में जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। योगी सरकार की इस कल्याणकारी योजना से अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों के जीवन में समृद्धि का एक नया सवेरा आने की उम्मीद है।


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