बबेरू/सिंहपुर/बांदा, के एस दुबे । शिक्षा विभाग द्वारा विद्यालयों में स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के दावे जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी हैं, इसकी एक तस्वीर विकास खंड बिसंडा के जूनियर हाईस्कूल सिंहपुर माफी में देखने को मिली। यहां विद्यार्थियों के लिए बनाए गए शौचालय बदहाल स्थिति में हैं। शौचालयों में साफ-सफाई के बजाय धूल, मलबा, निर्माण सामग्री और अनुपयोगी सामान भरा मिला। हालात ऐसे हैं कि कई शौचालय स्टोर रूम में तब्दील होते नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर टाइल्सयुक्त शौचालय तो बनवा दिए गए, लेकिन नियमित रखरखाव और सफाई की व्यवस्था न होने से वे धीरे-धीरे अनुपयोगी होते जा रहे हैं। विद्यालय परिसर में लगा पेयजल फ्रीजर भी क्षतिग्रस्त एवं उपेक्षित अवस्था में दिखाई दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालय उपयोग योग्य न होने से छात्राओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बार बालिकाओं को मजबूरी में विद्यालय परिसर के बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं, बल्कि बालिकाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छ विद्यालय अभियान की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, जब इस संबंध में विद्यालय के प्रधानाचार्य से बातचीत की गई तो उन्होंने यह कहते हुए जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि "प्रधान व्यवस्था नहीं करा रहा है, हम क्या करें?" इस जवाब के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। मामले को गंभीर मानते हुए ब्रजेश कुमार (विजय), रामगोपाल, मनोज कुमार, मनीष रैकवार, मूलचंद रैकवार सहित समस्त ग्रामवासी ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना-पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि जिलाधिकारी के स्तर से एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर विद्यालय का औचक निरीक्षण कराया जाए तथा यदि रखरखाव, स्वच्छता या शासकीय दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि शौचालयों को तत्काल उपयोग योग्य बनाया जाए, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए तथा क्षतिग्रस्त पेयजल फ्रीजर को ठीक कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को सम्मानजनक एवं सुरक्षित शैक्षिक वातावरण उपलब्ध हो सके। उनका कहना है कि विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की ऐसी स्थिति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।


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