चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में गुरुवार को व्याख्यान कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें महाराष्ट्र के लोनावाला स्थित कैवल्यधाम योग संस्थान के सेवानिवृत्त वरिष्ठ योग शिक्षक योगाचार्य भरत शिवहर्ष सिंह ने कहा कि तनाव, अनियमित दिनचर्या और लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम के दौर में योग शरीर के साथ मन को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। योग केवल आसन करने तक सीमित नहीं, बल्कि स्वस्थ, संयमित और अनुशासित जीवन पद्धति है। कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में दर्शन एवं योग विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली के तहत आयोजित व्याख्यानमाला में उन्होंने ‘आधुनिक जीवन शैली में योग की आवश्यकता एवं महत्व’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने महर्षि पतंजलि के अष्टांग
योग के आठ अंगों यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की उपयोगिता समझाई। उन्होंने कहा कि योग का उद्देश्य केवल शरीर को स्वस्थ रखना नहीं, बल्कि मन को शांत और एकाग्र करना भी है। योगाचार्य ने कहा कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग, पढ़ाई का दबाव, अनियमित नींद और खानपान विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। नियमित योग, ध्यान और श्वास अभ्यास से दिनचर्या को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने छात्रों को अपनी क्षमता के अनुसार योग सीखकर नियमित अभ्यास करने की सलाह दी। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. हरिकांत मिश्रा, डॉ. महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ. विनोद कुमार मिश्रा, डॉ. अमिता, डॉ. प्रमिला मिश्रा, जितेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. घनश्याम पाल, डॉ. प्रदीप कुमार गोंड समेत शिक्षक, शोधार्थी व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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