बांदा, के एस दुबे । नरैनी तहसील क्षेत्र के मोहनपुरवा और खलारी में कथित अवैध बालू खनन का कारोबार खुलेआम संचालित होने की जनचर्चाओं ने जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नदी क्षेत्रों में दिनदहाड़े भारी-भरकम पोकलैंड और जेसीबी मशीनों से बालू निकालकर ट्रकों और मिनी ट्रकों में लोडिंग कराई जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि यह गतिविधि नियमों के विपरीत है तो जिम्मेदार विभागों की नजर अब तक इस पर क्यों नहीं पड़ी। पुकारी गांव निवासी समाजसेवी रामकिशोर उपाध्याय द्वारा जीपीएस कैमरे से शूट किए गए फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। इन तस्वीरों और वीडियो में कथित रूप से नदी क्षेत्र में बालू की लोडिंग दिखाई दे रही है। उपाध्याय के मुताबिक उन्होंने मामले की जानकारी दूरभाष के माध्यम से जिलाधिकारी बांदा को दी, जिस पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
स्थानीय जनचर्चाओं में इस कथित खनन गतिविधि को लेकर श्यामू पटेल तथा जिला पंचायत सदस्य मीराबाई पटेल के भाई मोहनपुरवा निवासी प्रियांशु उर्फ ठोकिया पटेल के नाम भी लिए जा रहे हैं। हालांकि इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उनका पक्ष भी सामने नहीं आया है। इसलिए इन नामों का उल्लेख केवल स्थानीय चर्चाओं और आरोपों के संदर्भ में किया जा रहा है, न कि किसी अपराध के सिद्ध तथ्य के रूप में। मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी नरैनी से संपर्क किए जाने पर उनके द्वारा मामले को दिखवाने की बात कही गई। वहीं स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि रात के समय ट्रैक्टरों से कथित अवैध वसूली की जा रही है। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर स्थानीय पुलिस द्वारा इसे राजस्व विभाग से संबंधित मामला बताए जाने की बात कही जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नदी क्षेत्र में यदि भारी मशीनों के जरिए खुलेआम बालू की खुदाई और वाहनों की लोडिंग हो रही है, तो क्या स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को नहीं है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि जानकारी नहीं है तो प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जिलाधिकारी द्वारा दिए गए कार्रवाई के आश्वासन पर सबकी निगाहें टिकी हैं। प्रशासन यदि मौके पर जांच कराता है तो कथित अवैध खनन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है और यह भी स्पष्ट हो सकता है कि नदी से बालू निकालने के लिए किसके पास वैध अनुमति थी और नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। मोहनपुरवा और खलारी में उठे इन सवालों का जवाब अब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही मिलेगा। फिलहाल दिनदहाड़े चल रही कथित बालू लोडिंग ने नरैनी के स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।


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