बांदा के 39 वितरकों ने ‘नो मनी-नो इंडेंट’ अभियान में लिया हिस्सा, 26 को दिल्ली में धरने का एलान
बांदा, के एस दुबे । एलपीजी वितरकों ने विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आई) के आह्वान पर मंगलवार को देशभर में ‘नो मनी-नो इंडेंट’ अभियान चलाया गया। बांदा में भी जिले के 39 एलपीजी वितरकों ने तेल कंपनियों के खातों में भुगतान नहीं किया और गैस का इंडेंट नहीं लगाया। इसके चलते वितरकों ने मंगलवार को गैस की लोडिंग भी नहीं कराई। एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आशीष शुक्ला ने बताया कि देशभर के करीब 26 हजार एलपीजी वितरकों ने अभियान में हिस्सा लिया। इससे पहले सोमवार को जिला मुख्यालयों पर कैंडल मार्च निकालकर सरकार का ध्यान वितरकों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया
गया था। उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर को देशभर के वितरक दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा। वितरकों की प्रमुख मांगों में होम डिलीवरी और प्रशासनिक शुल्क (कमीशन) में तत्काल 75 रुपये की वृद्धि, उपभोक्ताओं पर पीएनजी लेने की अनिवार्यता संबंधी आदेश वापस लेना और प्रत्येक ई-केवाईसी के लिए 236 रुपये का भुगतान शामिल है। जिलाध्यक्ष आशीष शुक्ला ने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के अधिकारी वितरकों पर चूल्हा, रबर ट्यूब, फायरवॉल, ट्रॉली, चायपत्ती समेत अन्य उत्पादों की बिक्री का दबाव बनाते हैं। उन्होंने ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा तीन का हवाला देते हुए पांच और 19 किलोग्राम के सिलिंडरों की जबरन बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी उठाई। एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल से वितरकों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है।


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