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Monday, October 19, 2026

बेंदा खदान में बेलगाम खनन माफिया, ओवरलोडिंग की भरमार

बेंदा खदान में उड़ रही एनजीटी के निर्देशों की धज्जियां

ओवरलोडिंग वाहनों से बिगड़ रही मार्गों की दिशा और दशा

बांदा, के एस दुबे । वर्षाकाल समाप्त होने के बाद अवैध खनन का कालाकारोबार एक बार फिर से अपने पैर जमाने लगा है। जनपद के तिंदवारी थाना क्षेत्र के अन्तर्गत संचालित होने वाली बेंदा खदान एक बार फिर से चर्चा का विषय बनी हुई है। नदी की जलधारा में अवैध खनन से लेकर ओवरलोड वाहनों का खेल एक बार फिर से इस खदान मंे शुरू हो चुका है। यही यह कहा जाये कि बेंदा खदान में अवैध खनन और ओवरलोडिंग का जिन्न प्रकट हो गया है, तो काई अतिश्योक्ति नहीं होगी। खदान के अवैध अवैध खनन की कवरेज करने की टीम के कैमरों में कैद हुई तस्वीरों से साफ तौर पर देखा जा सकता है कि खदान संचाल को प्रशासन के किसी भी आदेश का भय नहीं है। तभी तो ओवरलोड गाड़ियों को लोड कर बालू के अवैध खनन का पहलवानी दावपंेच एक बार फिर से शुरू हो चुका है। 


आपको बताते चलें कि जनपद में लगातार हो रहे अवैध खनन बांदा वासियों के लिए अभिशाप बन चुका है। लगातार हो रहे अवैध खनन से जहां एक ओर नदी की जलधारा प्रभावित हो रही है। तो वहीं दूसरी ओर जनपद के तापमान और पर्यावरण संतुलन में भी काफी असर देखने को मिला है। गर्मी के दिनों केा बांदा जनपद का तापमान पूरे विश्व में रिकार्ड स्तर पर पर पहंुच चुका है। पर्यावरणविद और वैज्ञानिकों ने इसके लिए जनपद में अवैध खनन को पूरी तरह से जिम्मेदार माना था। लेकिन वर्षाकाल समाप्त होने के बाद एक बार फिर से खनन माफियाओं के हौंसले पहले की तरह ही बुलंद हो चुक हैं। इस बार शुरू होेते ही बेंदा खदान के संचालक और उसके गुर्गों ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया है। एक ओर जहां अवैध खनन में मशीनों से चलने से इलाकाई कांप रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर अवैध खनन से प्राप्त बालू को ओवरलोड वाहनों से स्थानीय सड़के कराह रही हैं। बेंदा खदान शुरू होते ही एनजीटी के निर्देश सहित सरकारी फरमान पूरी तरह से धराशाही होते नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो खदान से जुड़े लोगों का कहना है कि हमारा खेल पूरी तरह से सेट हैं। हमारी खदान में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की निगाह नहीं पड़ेगी। हमने सभी को सेट कर रखा है। अब देखना यह है कि इस खदान के अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर आखिर कब लगाम लगती है। या फिर बेंदा खदान पूर्व की भांति पहलवानी दांवपेच का अखाड़ा ही बनी रहती हैं।


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