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Monday, October 19, 2026

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की शुद्धता की जांच की प्रहरी बनी जल सखियां

बांदा में 3245 जल सखियों के कंधे पर है शुद्ध पेयजल जांच की जिम्मेदारी

पानी के नमूने लेने से लेकर शुद्धता भी परख रहीं ये महिलाएं

रेनवाटर हार्वेस्टिंग और जल संरक्षण के लिए भी गांव की जनता को कर रहीं जागरूक

बांदा, के एस दुबे । गांवों में प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने और उसकी गुणवत्ता ठीक करने की दिशा में योगी सरकार ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी को बढ़ा रही है। जल जीवन मिशन के तहत बांदा में हर घर जल नल योजना के अंतर्गत जिले में हजारों महिलाएं अब जल सखी के रूप में पेयजल की शुद्धता की निगरानी कर रही हैं। ये सभी महिलाएं गांवों में पानी के नमूने एकत्र करने से लेकर उनकी जांच करने और ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। जिससे गांवों में पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी तो मजबूत हो ही रही है साथ ही महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिल रहा है।



जिले के सभी 649 राजस्व गांव से 5-5 महिलाएं बनी जल सखियां

जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शुद्ध पेयजल मिले इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें जल सखी बनाया गया है। जहां 3245 जिले अपने इस काम को पूरी निष्ठा के साथ कर रही हैं। और लोगों को मिल रहे शुद्ध पेयजल में अपनी भागीदारी निभा रही हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं का सहयोग लिया जा रहा है। इन महिलाओं में ज्यादातर आशा, आंगनबाड़ी एएनएम व गावों की पढ़ी लिखी महिलाएं शामिल हैं। जिनका चयन ग्राम पंचायत के द्वारा ही किया जाता है और फिर विभाग के द्वारा इन्हें फील्ड टेस्ट किट दी जाती है। जिसके जरिए पानी की शुद्धता के 10 पैरामीटर कि उनके द्वारा जांच की जाती है और प्रति जांच के बदले इन जल सखियों को 20 दिए जाते है।


जल संरक्षण और बारिश के पानी को बचाने के लिए भी कर रहीं जागरूक

जल सखियों की भूमिका केवल लोगों को उनके घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचना ही नहीं है। बल्कि जल संरक्षण व उसके संचयन में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। ये जक सखियां ग्रामीणों को वर्षा जल संचयन यानी रेनवाटर हार्वेस्टिंग और पानी की बचत के उपायों के प्रति भी जागरूक कर रही हैं। इसके साथ ही महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित जल समितियों में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इससे गांवों में पेयजल आपूर्ति की निगरानी को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल रही है। पेयजल से संबंधित समस्याओं और शिकायतों को सामने लाने में भी जल सखियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है।






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