माता-पिता की सेवा और सम्मान को बताया सच्ची भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा
चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि : नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना के साथ माता-पिता के प्रति अपने कर्तव्यों को याद करने का भी अवसर है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं को अपनी जन्मदात्री मां के सम्मान, सेवा और उनकी भावनात्मक जरूरतों का भी ध्यान रखना चाहिए। यह विचार सीआइएसएफ, मुंबई में कार्यरत अखिलेश प्रधान सिंह ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नवरात्रि में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिरों में दर्शन करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। मां दुर्गा को चुनरी चढ़ाना, भोग लगाना और दीप जलाना आस्था के प्रतीक हैं, लेकिन भक्ति का वास्तविक महत्व हमारे व्यवहार और संस्कारों में भी दिखाई देना चाहिए।
अखिलेश प्रधान सिंह के अनुसार जिस मां ने बच्चों के पालन-पोषण और उनकी खुशियों के लिए जीवनभर त्याग किया, उसकी आवश्यकताओं को समझना और उसे समय देना भी जरूरी है। वृद्धावस्था में माता-पिता को भावनात्मक सहारे, सम्मान और अपनत्व की आवश्यकता होती है। हालांकि, हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं और वृद्धाश्रम में रहना अपने आप में उपेक्षा का प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि शक्ति, करुणा और नारी सम्मान का संदेश देता है। ऐसे में इस पर्व पर संकल्प लेना चाहिए कि धार्मिक आस्था के साथ माता-पिता के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारियों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।


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