देवेश प्रताप सिंह राठौर
वरिष्ठ पत्रकार
उत्तर प्रदेश झांसी मेडिकल कॉलेज के सीएमएस सचिन माहुर की कार्य शैली की हर जगह प्रशंसा होती है, हकीकत जानने के लिए मैं व्यक्तिगत मेडिकल कॉलेज का ओपीडी से लेकर मरीजों के जनरल वार्ड तक का जाकर मरीजों से हाल-चाल पूछ उनका कहना था की झांसी मेडिकल कॉलेज के सीएमएस सचिन माहुर बहुत ही कुशल नेतृत्व के करते हैं एवं गरीब और कमजोर व्यक्त की मन से सेवा एवं हर संभव मदद सरकार की तरफ से जितनी हो सकती है करते हैं और जो भी मेडिकल कॉलेज में सुविधा उपलब्ध होती है वह हमें प्राप्त कराने में दिक्कत नहीं होती है, कई मरीजो ने और उनके तीमारदारों ने कहा की मेडिकल कॉलेज बहुत बड़ा परिसर है,यहां जाओ वहां जाओ भाग दौड़ नहीं होती है सर सब सिस्टम बना हुआ है जो वहां का हर व्यक्ति कर्मचारी सही बता देता है, कहां आपको जाना है यह व्यवस्था सचिन माहुर ने बना रखी है,अब अस्पताल में सही जानकारी प्राप्त हो
जाती है, और सचिन माहुर सीएमएस मेडिकल कॉलेज जिनकी कार्य शैली मरीज और उनके साथ तीमारदारों से सुनकर अच्छा लगा , हमारी कोई व्यक्तिगत किसी से दुश्मनी नहीं होती है अगर कोई अच्छा कार्य करता है और मरीजों के हित के लिए कार्य करता है, सरकार की नीतियों को हर मरीज तक पहुंचाने का कार्य करता है, हम उसके समर्थन में खड़े रहते हैं और लिखकर समाज को बताना चाहते हैं, कि आज भी अच्छे लोगों की संख्या बहुत है पर समझने की जरूरत है। झांसी मेडिकल कॉलेज में जो भी कोई व्यवस्थाएं मरीज के हित के लिए मुनासिब होती है वह सीएमएस सचिन माहुर पूरा बंदोबस्त करते हैं और किस प्रकार से वह सुविधा मरीज तक पहुंचेगी वह पूरी व्यवस्था बनाते हैं। और एक खास बात और है सीएमएस सचिन माहुर में जो मैंने देखी है यह अपने कर्मचारियों और जो डॉक्टर ट्रेनिंग कर रहे हैं, और अन्य मेडिकल स्टाफ उनको बहुत प्यार से अच्छे तरीके से समझते हैं अगर कोई मरीज या उनके दिमारदार उनके साथ का व्यक्ति कुछ भी बोले किसी को जवाब नहीं देना है, आपको अपना चुपचाप काम करना है मरीज को हित को ध्यान रखते हुए बिल्कुल सच्चे मन से मरीज के प्रति समर्पित होकर काम करना है और अगर कोई गलत व्यवहार करता है तीमारदार या मैरिज को जवाब नहीं देना सुन लेना है, यह बात उन्होंने अपने स्टाफ और ट्रेनिंग डॉक्टर और ट्रेडिंग नर्सिंग स्टाफ और नर्सिंग कंफर्म स्टाफ से कहीं जो सीख रहे हैं और जो स्थाई तौर पर कार्यरत है उससे कहीं आप किसी को जवाब नहीं देंगे अपना काम करेंगे, मुझे बहुत अच्छा लगा यह सब होते हुए, परंतु मेरी व्यक्तिगत राय है मरीज के साथ जो परिवार के लोग कुछ होते हैं, कुछ बदतमीज भी होते हैं जिनका उद्देश्य सिर्फ लड़ाई करना सुविधा मिलती हैं, उसके विपरीत बोलना और अपनी ना समझी वाली बात करना ऐसे तत्व आते हैं, लेकिन उन सब पर सचिन माहुर का यही कहना था कि आप सभी का सम्मान करेंगे सभी के साथ सदव्यवहार करेंगे वह कुछ भी कहें आप सुनेंगे आप पलट कर जवाब नहीं देंगे हर बार उनका यही कहना था वास्तव में रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी के सीएमएस सचिन माहुर की तरह और लोग भी इस तरह व्यवहार करना सीखें तो मरीज का आधा रोग तो व्यवहार से ही ठीक हो सकता है और मरीज के हित के लिए जितना भी हो सके मन से कार्य करने की जरूरत है,वह झांसी के सीएमएस सचिन माहुर के व्यवहार और कार्य करने की क्षमता कूट-कूट कर भरी है और ऐसा अन्य लोगों को भी कैसे सीख लेनी चाहिए।


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