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Monday, August 10, 2026

भुगतान में भ्रष्टाचार, गौशालाओं की बदहाली और राजस्व विवादों को लेकर प्रशासकों ने खोला मोर्चा

डीएम और आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, सात दिन में समस्याओं के समाधान की मांग; आंदोलन की चेतावनी

बांदा, के एस दुबे । ग्राम पंचायतों में भुगतान में कथित भ्रष्टाचार, गौशालाओं की बदहाल व्यवस्था, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पुलिस की कथित एकतरफा कार्रवाई समेत विभिन्न समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले बांदा प्रशासक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को संघ के पदाधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी और आयुक्त को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की मांग की। संघ के जिलाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत गलौली के प्रशासक बृजेन्द्र सिंह गौतम के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में पांच प्रमुख मुद्दे उठाए गए। प्रशासकों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों में पुराने सत्रों की मजदूरी, सप्लाई, एसबीएम, सामुदायिक शौचालय तथा विधायक-सांसद निधि से संबंधित भुगतान लंबे समय से लंबित हैं। आरोप है कि भुगतान के लिए पंचायत सचिवों द्वारा कथित रूप से अनावश्यक परेशान किया जा रहा है, जिससे मजदूरों और सप्लायरों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।



गौशालाओं में चारा-दवा का संकट

प्रशासकों ने गौशालाओं की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई अस्थायी और स्थायी गौशालाओं में गौवंश के भरण-पोषण के लिए धनराशि समय से नहीं पहुंच रही है। गलौली की गौशाला में पुराने भुगतान लंबित होने के साथ ही नए गौवंश आने से चारा, भूसा और दवाओं की समस्या बढ़ गई है। प्रशासकों के अनुसार कई गौशालाएं क्षमता से अधिक गौवंश का बोझ झेल रही हैं।


छह माह से पैमाइश लंबित, बढ़ रहे भूमि विवाद

ज्ञापन में राजस्व विभाग पर पंचायतों का अपेक्षित सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया। प्रशासकों ने कहा कि पट्टा, पैमाइश, अतिक्रमण हटाने और सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों की फाइलें लंबे समय तक तहसीलों में लंबित रहती हैं। इससे गांवों में भूमि विवाद बढ़ रहे हैं और कई मामलों में विवाद मारपीट व मुकदमेबाजी तक पहुंच रहे हैं। कानाखेड़ा के प्रशासक विन्देश कुमार ने कहा कि कई मामलों में महीनों से पैमाइश नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति पैदा हो रही है।


स्थानांतरण और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल

प्रशासकों ने पंचायतों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण में मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी संघ ने निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रशासकों का आरोप है कि पंचायतों से जुड़े विवादों में कई बार तथ्यों की पूरी जांच किए बिना प्रधानों और प्रशासकों के खिलाफ नोटिस अथवा एफआईआर जैसी कार्रवाई की जा रही है।


सात दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र सिंह गौतम ने कहा कि भुगतान के नाम पर कथित भ्रष्टाचार से प्रधान, मजदूर और सप्लायर परेशान हैं। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन के लिए मजबूर होगा। प्रशासक संघ ने मांग की है कि सात दिन के भीतर प्रशासक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सभी समस्याओं का समाधान कराया जाए। मांगें पूरी नहीं होने पर संगठन ने आंदोलन की चेतावनी दी है। ये प्रशासक रहे मौजूद ज्ञापन सौंपने वालों में बृजेन्द्र सिंह गौतम-गलौली, विन्देश कुमार-कानाखेड़ा, उजैर खान-को अदरी, मूलचन्द्र निषाद-झंझरी, सिंधनकला के प्रशासक, रोहित-तेराब, जयकरण यादव-तांगामऊ, हरिश्चंद्र-पड़ेरी, लालाभैया, अशोक कुमार-चिल्ली, आरबी यादव-टोलाकाजी, आशा-पचनेही,रामऔतार-डिंगवाही और रमाकांत शुक्ला-जमालपुर सहित अन्य प्रशासक शामिल रहे।





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