जहाँ होना था छात्राओं का बसेरा, वहाँ बँध रहीं भैंसें,3 दिन से छात्रों का उग्र अनशन
बांदा, के एस दुबे । पंडित जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं और कथित घोर लापरवाही के चलते छात्रों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े करीब आधा सैकड़ा छात्र-छात्राएं कॉलेज गेट पर तंबू गाड़कर लगातार तीसरे दिन भी क्रमिक अनशन पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए एक ऐसा सनसनीखेज आरोप लगाया है, जिसने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। छात्रों का सबसे गंभीर और चौंकाने वाला आरोप महिला छात्रावास की बदहाली को लेकर है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कॉलेज परिसर में महिला छात्रावास का निर्माण हुए 15 साल से अधिक का समय बीत
चुका है, लेकिन आज तक एक भी छात्रा को इसका आवंटन नहीं किया गया। नतीजा यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह बहुमूल्य भवन छात्राओं के सुरक्षित आश्रय की बजाय कथित तौर पर मवेशियों (भैंसों) का ठिकाना बन गया है। छात्रों ने तंज कसते हुए कहा कि यह भवन अब छात्रावास कम और मवेशियों का तबेला ज्यादा नजर आ रहा है। आंदोलित छात्रों ने खेल सुविधाओं पर भी सवालिया निशान खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि कॉलेज प्रशासन द्वारा हर छात्र से खेल मद के नाम पर करीब 250 रुपये वसूले जाते हैं, इसके बावजूद परिसर में न तो पर्याप्त खेल सामग्री है और न ही खेलकूद की कोई बुनियादी सुविधा। छात्रों ने इस मद से की गई वसूली और उसके व्यय का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा, पूर्व प्राचार्य द्वारा लंबे समय से प्राचार्य आवास के इस्तेमाल और कॉलेज की संपत्तियों के कथित निजी उपयोग पर भी कड़े सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जिलाधिकारी अमित आसेरी से कॉलेज पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और ज्ञापन लेने का अनुरोध किया था, लेकिन उनके मौके पर न पहुँचने से छात्रों में नाराजगी और बढ़ गई। इसके विरोध में छात्रों ने कॉलेज गेट पर ही डेरा डाल दिया है। तीसरे दिन भी अनशन जारी रहने से कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। छात्रों ने दो टूक चेतावनी दे दी है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर जवाब नहीं देते और व्यवस्थाओं में सुधार की ठोस गारंटी नहीं मिलती, तब तक यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा।


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