उरई (जालौन)। गैर प्रांतों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते जहां जनपद जालौन में यमुना पट्टी के डेढ़ सैकड़ा से ज्यादा गांव पूरी तरह से
जलमग्न हो गये जिससे वहां निवास करने वाले ग्रामीणों की बुश्किलें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। बात करें राहत इंतजामों की तो वह अब तक नाकाफी नजर आ रहे हैं। जिन गांवों में अधिकारी पहुंच भी रहे है तो वह दो रुपये के बिस्कुट पैकेट बच्चों को बांटकर राहत सामग्री के नाम पर उनके साथ भद्दा मजाक करने से नहीं चूक रहे हैं।
उल्लेखनीय हो कि पिछले सप्ताह भर से ज्यादा समय हो चुका है यमुना पट्टी के गांवों में बाढ़ का प्रकोप बना हुआ है। लेकिन समय रहते प्रशासन ने बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिये अब तक कोई कार्ययोजना न बनाये जाने से बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों के सामने अपने परिजनों का पेट भरने की चिंता सताने लगी है। तो वहीं बेजुवान पशुओं के सामने भी चारे का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ का आलम यह है कि जो गांव बाढ़ के पानी से चारों ओर से घिरे हुये हैं वहां के लोग गांव में ही कैद होने को विवश हो गये और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में जुटे नजर आ रहे हैं। हैरानी इस बात की भी कि जनपद के स्वयंसेवी संगठन भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिये अब अब आगे नहीं आये जिससे बाढ़ प्रभावितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है।


No comments:
Post a Comment