ग्राम प्रधानों को सौंपी गईं समितियों की जिम्मेदारियां
बांदा, के0 एस0 दुबे । दूसरे राज्यों से लौटने वाले प्रवासी मजदूरों की निगरानी के साथ ही उनकी परेशानियों को सुलझाने में निगरानी समितियां सक्रिय भूमिका निभाएंगी। जिला प्रशासन और यूनिसेफ के तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में प्रशिक्षकों ने ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारियों के साथ समिति क्रियान्वयन की जानकारी दी। पहले दिन चार ब्लाकों के ग्राम प्रधानों ने भागीदारी की।
यूनिसेफ और जिला प्रशासन के अगुवाई में आयोजित कार्यशाला के पहले दिन शुक्रवार को जिले के बड़ोखर खुर्द, महुआ, जसपुरा व तिंदवारी में ग्राम प्रधानों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी हरिश्चंद्र वर्मा ने
कहा कि अस्पतालों में मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ के अलावा भी तमाम कोरोना योद्धा हैं। निगरानी समितियां इन्हीं में से एक हैं। निगरानी समितियां प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का ग्राम स्तर पर पालन करवा रही हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में अपने गांवों की ओर रुख कर रहे प्रवासी मजदूरों से अन्य लोगों में संक्रमण न फैले, इसके लिए क्वारंटीन सेंटर में रखे गए परिवारों की निगरानी के साथ उनकी सुविधा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। ग्राम प्रधानों व सभासदों की अध्यक्षता में गठित की गई ग्राम व शहरी निगरानी समितियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। यूनिसेफ के जिला मोबिलाइजेशन समन्वयक फुजैले सिद्दीकी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान ग्राम प्रधानों को उनकी जिम्मेदारियों व समिति के क्रियान्वयन की प्रक्रिया के बारे में बताया गया। समिति की अध्यक्षता करते हुए ग्राम प्रधान सार्वजानिक स्थानों, गलियों, सार्वजनिक पेयजल स्रोतों तथा क्वारंटाइन किए गए घरों के आसपास विसंक्रमण सुनिश्चित कराएंगे। निकरानी समिति क्वारंटाइन किए गए घरों में शौचालय व सार्वजनिक हैंडपंप पर हाथ धोने के लिए साबुन की व्यवस्था व उसकी सफाई सुनिश्चित कराएगी। होम क्वारंटाइन व सरकारी निर्देशों के बारे में लोगों को जागरुक करेंगे।
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| कार्यशाला में मौजूद अधिकारी और कर्मचारी |


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